मोदी–कार्नी वार्ता से भारत-कनाडा संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद

नई दिल्ली, 26 फरवरी। भारत सरकार ने कहा है कि अगले सप्ताह होने वाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच व्यापक वार्ता दोनों देशों के बीच भविष्योन्मुखी साझेदारी को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। कार्नी शुक्रवार से भारत की चार दिवसीय यात्रा पर रहेंगे, जो प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी पहली भारत यात्रा है।

यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देना है, जो वर्ष 2023 में कनाडा में एक खालिस्तानी अलगाववादी की हत्या को लेकर उत्पन्न राजनयिक विवाद के बाद तनावपूर्ण हो गए थे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता व्यापार, निवेश, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, कृषि, शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

कार्नी अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से करेंगे, जहां वह व्यापारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे और भारतीय तथा कनाडाई कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों, आर्थिक विशेषज्ञों और नवोन्मेषकों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां सोमवार को दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच औपचारिक वार्ता होगी। दोनों नेता भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भी भाग लेंगे।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा। दोनों पक्ष एक रचनात्मक और संतुलित साझेदारी के निर्माण पर जोर देंगे, जो पारस्परिक सम्मान, जन-संपर्कों और आर्थिक सहयोग पर आधारित होगी।

भारत और कनाडा के संबंध वर्ष 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे। उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संभावित भारतीय संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को वापस बुलाने और निष्कासित करने जैसे कदम उठाए थे।

हालांकि पिछले कुछ महीनों में संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई सकारात्मक पहलें की गई हैं। दोनों देशों ने अपनी-अपनी राजधानियों में उच्चायुक्तों की पुनर्नियुक्ति की है और आर्थिक सहयोग को पुनर्जीवित करने के प्रयास तेज किए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत-कनाडा सहयोग ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला सुदृढ़ीकरण और प्रौद्योगिकी साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रस्तावित वार्ता से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में ठोस प्रगति होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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