यूपी बजट पर ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ का आरोप, संजय सिंह बोले- कटौती छिपाकर बढ़ोतरी का भ्रम

लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार के 2026–27 बजट पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले 2025–26 के निर्धारित बजट को संशोधित कर घटाती है और फिर उसी घटे हुए आधार से तुलना कर 17%, 28% और 59% तक बढ़ोतरी का दावा करती है, जिससे वास्तविक स्थिति छिप जाती है। उनके अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण विकास जैसे मूल क्षेत्रों में वास्तविक व्यय घटाया गया है।

संजय सिंह ने कहा कि शिक्षा, खेल, कला एवं संस्कृति के लिए 2025–26 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे संशोधित कर 84 हजार करोड़ कर दिया गया। इसके बाद 2026–27 में 1.08 लाख करोड़ घोषित कर 28% वृद्धि का प्रचार किया गया, जबकि मूल प्रावधान से तुलना करने पर बढ़ोतरी नगण्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऊर्जा, स्वास्थ्य, परिवहन, ग्रामीण विकास और समाज कल्याण में भी पहले कटौती कर बाद में वृद्धि का शोर मचाया गया।

खर्च के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2024–25 में हाउसिंग, जलापूर्ति, सिंचाई, स्वास्थ्य, शहरी और ग्रामीण विकास सहित कई क्षेत्रों में निर्धारित बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में भी कम व्यय हुआ। उनका कहना था कि “यह बजट विकास का नहीं, भ्रम का दस्तावेज है।”

उन्होंने योगी आदित्यनाथ सरकार पर प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के बजाय घोषणाओं और प्रचार पर अधिक जोर दिख रहा है।

धार्मिक मामलों पर बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि यदि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई हुई तो पार्टी सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।

उन्होंने घोषणा की कि 4 से 9 अप्रैल तक आगरा से मथुरा तक ‘रोजगार दो–सामाजिक न्याय दो’ पदयात्रा का चौथा चरण निकाला जाएगा। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रमुख का चुनाव सीधे जनता से कराने की मांग दोहराई, ताकि कथित खरीद-फरोख्त पर रोक लग सके।

यूजीसी बिल पर टिप्पणी करते हुए संजय सिंह ने इसे समाज को विभाजित करने वाला कदम बताया और कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में समानता और पारदर्शिता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने ऐलान किया कि पार्टी प्रदेश भर में बजट के मुद्दे पर जनजागरण अभियान चलाएगी और “वास्तविक खर्च बनाम घोषणाओं” की सच्चाई जनता के सामने रखेगी।

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