संविधान जागरूकता की अनूठी पहल, युवाओं को अधिकार-कर्तव्य का मिला संदेश

शाहजहांपुर में सामाजिक चेतना को सशक्त बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल करते हुए उद्देश्यिका सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा संविधान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवाओं में संवैधानिक मूल्यों, अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित करना रहा। आयोजन में शिक्षकों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर आयुक्त डॉ. बिपिन कुमार मिश्रा ने संविधान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती नागरिकों की जागरूकता और जिम्मेदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी समान रूप से पालन करना चाहिए, तभी समाज में संतुलन और न्याय की स्थापना संभव है।

फाउंडेशन के निदेशक पवन आर्य ने संस्था की कार्यप्रणाली और उद्देश्य पर जानकारी देते हुए बताया कि संगठन समाज में संवैधानिक चेतना को बढ़ावा देने और शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

वहीं उद्देश्यिका डिजी स्कूल के निदेशक सुमित गुप्ता ने विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही संविधान की मूल अवधारणाओं से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को कम उम्र से ही अधिकारों और जिम्मेदारियों की समझ दी जाए, तो वे भविष्य में अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं।

कार्यक्रम की प्रायोजक काजल मिश्रा ने समाज में महिलाओं की समान भागीदारी और सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया। अन्य वक्ताओं ने भी संवैधानिक मूल्यों की प्रासंगिकता, सामाजिक समरसता और नागरिक दायित्वों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही घोषणा की गई कि ‘संविधान कथा’ का आयोजन प्रत्येक माह की 26 तारीख को नियमित रूप से किया जाएगा, ताकि समाज में जागरूकता का यह अभियान निरंतर जारी रहे।

उपस्थित प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताते हुए ऐसी पहलों को समय की आवश्यकता बताया। यह आयोजन संविधान के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आया।

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