नए यूजीसी नियमों के खिलाफ खुलकर सामने आए भाजपा सांसद करण भूषण सिंह और बृजभूषण शरण सिंह

लखनऊ, 28 जनवरी  — भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, नए यूजीसी नियमों के खिलाफ खुलकर सामने आए हैं। दोनों नेताओं ने इन नियमों पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि इससे समाज में जाति आधारित वैमनस्यता बढ़ने की आशंका है।

करण भूषण सिंह ने स्पष्ट किया कि संसद की जिस स्थायी समिति के वह सदस्य हैं, उसका इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर उनके खिलाफ भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जो बिना उनका पक्ष जाने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “मेरी भावनाएं समाज के लोगों के साथ हैं। मेरी मांग है कि यूजीसी इस नियम पर पुनर्विचार करे, जनभावना का सम्मान करे और आवश्यक सुधार लाए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार की जाति आधारित वैमनस्यता न फैल सके।” सांसद ने यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों को जातिगत संघर्ष का केंद्र नहीं बनने दिया जा सकता।

वहीं, बृजभूषण शरण सिंह ने भी ‘एक्स’ पर जारी एक वीडियो के जरिए नए यूजीसी नियमों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं के आधार पर बनाए गए इस कानून से समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है और देशभर में इसका विरोध हो रहा है। उनके अनुसार, यह नियम कानून के नाम पर समुदायों के बीच अविश्वास को जन्म दे रहा है।

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके यहां सवर्ण, दलित और पिछड़े वर्गों के बच्चे बिना किसी भेदभाव के साथ खेलते-कूदते हैं और एक-दूसरे के घर आना-जाना भी है। उन्होंने कहा कि यह किसी कानून की वजह से नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और संस्कृति की विरासत के कारण संभव है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति समाज के कमजोर वर्गों को ऊपर उठाने की शिक्षा देती है, न कि समाज को बांटने की। उन्होंने चेतावनी दी कि असंतुलित कानून भविष्य में अस्वस्थ सामाजिक माहौल पैदा कर सकता है। उनका कहना था कि अपराध करने वालों को दंड मिलना चाहिए, लेकिन कानून बनाते समय सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

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