मैकाले के षड्यंत्रों ने भरी हीनभावना, इस सरकार ने उसे तोड़ने का साहस किया: राष्ट्रपति मुर्मू

नयी दिल्ली, 28 जनवरी । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि गुलामी के कालखंड में मैकाले के षड्यंत्रों के जरिए भारत के लोगों में हीनभावना भरी गई थी, लेकिन आज़ादी के बाद पहली बार मौजूदा सरकार ने उस मानसिकता को तोड़ने का साहस किया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आधुनिक विकास के साथ-साथ राष्ट्रीय आत्मसम्मान और सांस्कृतिक स्वाभिमान को भी समान महत्व देना आवश्यक है।

संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सांस्कृतिक दृष्टि से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है और सरकार इस विरासत को देश की ताकत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में भारत की सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान परंपरा को कमजोर करने का प्रयास किया गया, जिसका प्रभाव लंबे समय तक लोगों की मानसिकता पर रहा।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “गुलामी के कालखंड में मैकाले के षड्यंत्रों द्वारा भारत के लोगों में हीनभावना भरने का काम किया गया था। अब आज़ादी के बाद पहली बार मेरी सरकार ने उसे तोड़ने का साहस किया है।” उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और संवारने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से सवा सौ वर्षों बाद भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भारत वापस लौटे हैं और उन्हें अब सामान्य जनमानस के दर्शन के लिए समर्पित किया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति बढ़ते सम्मान का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष सौराष्ट्र स्थित सोमनाथ मंदिर के नवनिर्माण के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के बाद एक हजार वर्षों की यात्रा भारत की धार्मिक निष्ठा, सनातन संस्कृति और चिर आस्था का प्रतीक है। इस अवसर पर देशभर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में लोगों की व्यापक भागीदारी उत्साहजनक रही।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में राजेंद्र चोल द्वारा गंगईकोंडा-चोलापुरम् की स्थापना के एक हजार वर्ष पूरे हुए, जिसने करोड़ों देशवासियों को अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करने का अवसर दिया।

राष्ट्रपति मुर्मू ने दीपावली की वैश्विक लोकप्रियता और यूनेस्को द्वारा इसे ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ की सूची में शामिल किए जाने को भारतीयों के लिए गर्व की बात बताया। उन्होंने कहा, “जब हम अपनी परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करते हैं, तो विश्व भी उनका सम्मान करता है।”

आदिवासी विरासत के संरक्षण का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार देशभर में आदिवासी संग्रहालयों का निर्माण कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का हाल ही में लोकार्पण किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने संविधान का संथाली भाषा में अनुवाद कराकर आदिवासी समाज के गौरव को बढ़ाया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सांस्कृतिक स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ता भारत ही विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकता है।

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