सड़क हादसों में असमय मौतों से व्यथित डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर में हेलमेट अभियान की घोषणा

लखनऊ। सरोजनीनगर क्षेत्र में हाल के दिनों में सड़क हादसों में पार्टी कार्यकर्ताओं के बच्चों की असमय और दर्दनाक मौतों से आहत विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने एक सशक्त सड़क-सुरक्षा पहल की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी त्रासद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवहारिक और ठोस कदम उठाए जाना अनिवार्य है।

हाल ही में हुई दो हृदयविदारक घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डाल दिया है। भाजपा बूथ अध्यक्ष गुड़िया गौतम के 18 वर्षीय पुत्र राहुल केवल एक किलोमीटर दूर दूध लेने मोटरसाइकिल से गए थे। घने कोहरे के कारण उनकी मोटरसाइकिल पेड़ से टकरा गई और सिर में गंभीर चोट लगने से उनकी मृत्यु हो गई। इसी तरह महिला मंडल प्रभारी प्रियंका सिंह के 18 वर्षीय भतीजे अनुराग पास की दुकान से समोसा लेने निकले थे, लेकिन सड़क दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट आने से उनकी भी जान चली गई। इन युवा और मासूम जीवनों की क्षति ने न केवल परिवारों, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और स्वयं डॉ. राजेश्वर सिंह को गहराई से व्यथित कर दिया है।

इन घटनाओं पर शोक व्यक्त करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने घोषणा की कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से इसी सप्ताह सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में 1,000 हेलमेट वितरित किए जाएंगे। ये हेलमेट सभी बूथ अध्यक्षों और पार्टी पदाधिकारियों को दिए जाएंगे, ताकि वे स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें और अपने बच्चों सहित युवाओं को छोटी दूरी के लिए भी मोटरसाइकिल चलाते समय हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करें।
डॉ. सिंह ने कहा, “कुछ क्षणों की लापरवाही जीवन भर का दर्द बन जाती है। ये मौतें रोकी जा सकती थीं। बच्चों की सुरक्षा के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने देश और प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की भयावह स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.8 लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवाते हैं, यानी औसतन प्रतिदिन करीब 500 मौतें। इन हादसों में लगभग 66 प्रतिशत मृतकों की आयु 18 से 34 वर्ष के बीच होती है। उत्तर प्रदेश सड़क दुर्घटनाओं में सर्वाधिक मौतों वाला राज्य है। वर्ष 2024 में प्रदेश में 46,052 सड़क हादसों में 24,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई, जबकि राजधानी लखनऊ में ही करीब 1,630 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।

उन्होंने अन्य दुखद घटनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें गलत दिशा से आ रहे डंपर से कुचलकर धीरज शुक्ला के पुत्र की मृत्यु तथा बंथरा में स्कॉर्पियो वाहन से कुचलकर अर्पित त्रिवेदी की मृत्यु शामिल है। उसी घटना में युवती काजल की भी जान चली गई, जो तेज और लापरवाह ड्राइविंग का भयावह परिणाम है। इस मामले में आरोपी बलवीर यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि वे सड़क हादसों के इस गंभीर विषय को माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे और दुर्घटना-संभावित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार के साथ-साथ लापरवाह और खतरनाक ड्राइविंग के लिए कड़े दंड सुनिश्चित करने की मांग करेंगे। उन्होंने दोहराया कि विकास के साथ सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है और युवाओं के जीवन की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि मंगलवार को डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने विधानसभा क्षेत्र में पिछले एक माह के दौरान स्वास्थ्य कारणों और दुर्घटनाओं में अपने प्रियजनों को खोने वाले 13 से अधिक शोकसंतप्त परिवारों से व्यक्तिगत रूप से भेंट की। उन्होंने उनका दुख साझा किया और सांत्वना प्रदान की। इस दौरान उन्होंने बूथ अध्यक्ष गुड़िया गौतम के एक लाख रुपये के बैंक ऋण की अदायगी कराई। इसके साथ ही छह परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए शुल्क प्रतिपूर्ति, प्रवेश, पाठ्य-पुस्तकों और भविष्य में सहयोग का आश्वासन दिया।

इसके अतिरिक्त, पांच जरूरतमंद परिवारों के सदस्यों को रोजगार उपलब्ध कराने अथवा निजी क्षेत्र में नियुक्ति दिलाने की जिम्मेदारी ली गई। चार अस्वस्थ और दिव्यांग व्यक्तियों के उपचार, अस्पताल में भर्ती, एम्बुलेंस सुविधा और आर्थिक सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई। चार मामलों में विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, बाल सेवा योजना और पारिवारिक लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई कराई गई। अन्य मामलों में सामाजिक सुरक्षा और मानवीय सहायता से जुड़े निर्देश जारी किए गए, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सहयोग से वंचित न रहे।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने अपील की कि अभिभावक और युवा स्वयं जागरूक बनें और हेलमेट जैसे बुनियादी सुरक्षा उपायों को जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाएं, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसे असहनीय दर्द से न गुजरना पड़े।

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