भोजशाला फैसले के बाद ज्ञानवापी मामले में तेज हुई मांग, पक्षकारों ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन

वाराणसी, 17 मई 2026 (यूएनएस)। मध्य प्रदेश की भोजशाला से जुड़े फैसले के बाद वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर मामले में भी जल्द निर्णय की मांग तेज हो गई है। शनिवार को ज्ञानवापी मामले के हिंदू पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और मामले में शीघ्र फैसले के लिए प्रार्थना की।

मंदिर परिसर के बाहर पक्षकारों और समर्थकों ने “हर-हर महादेव” और “मां श्रृंगार गौरी” के जयकारे लगाए। इस दौरान उन्होंने ज्ञानवापी विवाद में जल्द न्यायिक निर्णय की उम्मीद जताई।

हिंदू पक्षकार सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि वर्ष 2022 में इसी दिन ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने वाले क्षेत्र में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था। उन्होंने कहा कि उसी अवसर को याद करते हुए वे बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा कि अदालत में उनकी कानूनी लड़ाई जारी है और उन्हें विश्वास है कि हिंदू पक्ष को सफलता मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिस मंदिर पर “आक्रांताओं द्वारा कब्जा” किए जाने का दावा किया जा रहा है, वह जल्द मुक्त होगा।

मामले के पैरोकार सोहनलाल आर्य ने कहा कि 16 मई 2022 को ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने के बाद से जनजागरण का अभियान लगातार चल रहा है। उन्होंने सरकार और अदालत से अयोध्या की तर्ज पर वाराणसी में भी भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करने की मांग की।

सोहनलाल आर्य ने कहा कि भोजशाला और श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े मामलों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट महत्वपूर्ण आधार बनी थी। उन्होंने मांग की कि ज्ञानवापी मामले में भी एएसआई रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुनाया जाए।

वहीं हिंदू पक्ष की सदस्य सीता साहू ने भोजशाला फैसले को सनातन समाज के लिए खुशी का दिन बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद आया है।

सीता साहू ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर में कथित शिवलिंग मिलने की घटना हिंदू समाज के लिए आस्था का विषय है, लेकिन अभी वहां नियमित पूजा और जलाभिषेक की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में उन्होंने यही प्रार्थना की है कि जल्द से जल्द ज्ञानवापी परिसर में पूजा-पाठ की अनुमति मिले।

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