नई दिल्ली, 15 मई 2026। उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सेंगर की आजीवन कारावास की सजा फिलहाल बरकरार रहेगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें 2017 के उन्नाव बलात्कार मामले में सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था। साथ ही उच्च न्यायालय को मामले पर नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय सेंगर की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास के खिलाफ दायर मुख्य याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास करे। यदि निर्धारित समय में मुख्य याचिका पर निर्णय संभव न हो, तो ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले सजा निलंबन संबंधी याचिका पर आदेश पारित किया जाए।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और उच्च न्यायालय स्वतंत्र रूप से नए सिरे से सुनवाई कर सकता है।
प्रधान न्यायाधीश ने दिल्ली उच्च न्यायालय से यह भी विचार करने को कहा कि क्या किसी विधायक को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमे के दौरान लोक सेवक माना जा सकता है या नहीं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष 29 दिसंबर को भी उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित की गई थी। उस समय न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि सेंगर को हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को दिए अपने आदेश में कहा था कि कुलदीप सिंह सेंगर को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(सी) के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत “लोक सेवक” की परिभाषा में नहीं आता।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि सेंगर सात वर्ष पांच महीने की सजा काट चुका है, इसलिए उसकी अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित की जा सकती है।
हालांकि इस आदेश के बाद देशभर में व्यापक विरोध हुआ था। पीड़िता, उसके परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इसे न्याय के विपरीत बताया था।
