लखनऊ, 15 मई 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में अनियमितताओं और निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर करीब 200 निजी चिकित्सालयों पर सख्त कदम उठाए गए हैं। इनमें 100 अस्पतालों का भुगतान रोक दिया गया है, जबकि लगभग 100 अन्य अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है।
राज्य स्वास्थ्य अभिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण योजना है। प्रदेश सरकार इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि अस्पतालों की सूचीबद्धता और गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया गया है। अस्पताल सूचीबद्धता प्रणाली पोर्टल के माध्यम से सूचीबद्ध अस्पतालों का सत्यापन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों को 35 महत्वपूर्ण मानकों को पूरा करना अनिवार्य किया गया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राज्य स्वास्थ्य अभिकरण की ओर से ई-मेल, दूरभाष, संदेश, पत्राचार और आभासी बैठकों के माध्यम से अस्पतालों को हर स्तर पर सहायता प्रदान की गई। इसका परिणाम यह रहा कि 95 प्रतिशत से अधिक अस्पताल सफलतापूर्वक नए पोर्टल पर स्थानांतरित हो चुके हैं।
हालांकि कुछ निजी अस्पताल निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। सरकार की ओर से कई अवसर दिए जाने के बावजूद करीब 200 निजी चिकित्सालय मानकों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी करने में विफल रहे।
कार्रवाई की जद में आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़, बागपत, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, मथुरा, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, सुल्तानपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, जालौन, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, रामपुर और सोनभद्र समेत कई जिलों के अस्पताल शामिल हैं।
प्रदेश सरकार ने मरीजों को बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य अभिलेख प्रणाली को भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है। इसके माध्यम से मरीजों का स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और उपचार प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित तथा तेज हो सकेगी।
