लखनऊ में 24 अप्रैल को जोनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस, कृषि विकास और किसान आय वृद्धि पर बनेगी रणनीति

लखनऊ, 23 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर भारत के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 24 अप्रैल को लखनऊ में जोनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह सम्मेलन उत्तर भारत के कृषि तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है और इसे तकनीक, नवाचार और बेहतर नीतियों के माध्यम से और सशक्त बनाया जाएगा।

इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ सहित कुल 9 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी होगी। ये सभी क्षेत्र गेहूं, धान, गन्ना, दूध, फल और सब्जियों के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।

सम्मेलन “साझा जिम्मेदारी और साझा समाधान” के मॉडल पर आधारित है, जिसका उद्देश्य खेती, तकनीक, विपणन और कृषि अवसंरचना से जुड़े मुद्दों पर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। कार्यक्रम के दौरान कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, आत्मनिर्भर भारत के तहत दलहन मिशन, राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन और डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।

इसके अलावा उर्वरकों की उपलब्धता, उनके संतुलित उपयोग और कालाबाजारी पर नियंत्रण जैसे जमीनी मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा होगी। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि अपनी-अपनी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा करेंगे। इसमें उत्तर प्रदेश की गन्ने के साथ अंतरफसली खेती और डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस तकनीक, हरियाणा की “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पोर्टल, पंजाब की फसल विविधीकरण पहल और पहाड़ी राज्यों की बागवानी उपलब्धियां शामिल हैं।

यह सम्मेलन बहु-हितधारक संवाद का सशक्त मंच भी बनेगा, जिसमें आईसीएआर के वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, एफपीओ, स्टार्टअप्स, एग्री-टेक कंपनियां तथा नाबार्ड, नाफेड, एनसीसीएफ और एनएससी जैसी संस्थाएं भाग लेंगी। महिला किसान उत्पादक संगठनों और प्रगतिशील किसानों की भागीदारी इसे और अधिक समावेशी बनाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान, गेहूं, मिलेट्स और दलहन-तिलहन की खरीद सुनिश्चित करने की दिशा में किए गए प्रयासों को भी सम्मेलन में प्रमुखता से रखा जाएगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

लखनऊ में आयोजित यह सम्मेलन जयपुर, विशाखापट्टनम और गुवाहाटी में आयोजित जोनल कॉन्फ्रेंस श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन क्षेत्रीय सम्मेलनों के निष्कर्षों को 28-29 मई को दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में शामिल किया जाएगा, जहां इन्हें राष्ट्रीय रणनीति का रूप दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इस प्रकार के प्रयास न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाएंगे, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि कर “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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