बसंत उत्सव–2026 का दूसरा चरण सम्पन्न, आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हुआ आश्रम

शाहजहांपुर। श्री रामचंद्र मिशन के रामचंद्र मिशन आश्रम में आयोजित बसंत उत्सव–2026 के दूसरे चरण का बुधवार को आध्यात्मिक वातावरण में भव्य समापन हो गया। प्रातःकाल आयोजित सामूहिक ध्यान सत्र में देश और विदेश से आए हजारों साधकों ने एकाग्रचित्त होकर मानव कल्याण, वैश्विक सद्भाव और विश्व शांति की कामना की। ध्यान के दौरान आश्रम परिसर में अनुशासन, शांति और आंतरिक ऊर्जा का विशेष वातावरण अनुभव किया गया।

मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के मार्गदर्शन में सम्पन्न ध्यान सत्र साधकों के लिए गहन आध्यात्मिक अनुभव का अवसर बना। अपने संदेश में दाजी ने कहा कि नियमित ध्यान व्यक्ति के मन को स्थिरता, स्पष्टता और आंतरिक संतुलन प्रदान करता है। उन्होंने साधकों से आह्वान किया कि वे ध्यान साधना को दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाकर आत्मिक उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ें।

समापन समारोह में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा विश्व को दिशा देने की क्षमता रखती है और ऐसे आयोजन मानवता को जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने आश्रम परिवार द्वारा समाज में शांति और सद्भाव के प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

यह उत्सव आश्रम स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने तथा आदि गुरु लालाजी महाराज की 153वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया। समापन सत्र में उपस्थित साधकों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का गायन किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद तीन दिवसीय प्रवास पर आश्रम पहुंचे थे। ध्यान साधना में सहभागिता के पश्चात वे बुधवार को वापस रवाना हुए। आश्रम परिवार की ओर से उन्हें भावभीनी विदाई दी गई। आयोजन की सफलता में मिशन के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय श्रद्धालुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दूसरे चरण के सफल समापन के साथ ही बसंत उत्सव के तीसरे चरण की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं। आश्रम परिसर में जहां विदाई की भावुकता दिखाई दी, वहीं आगामी चरण को लेकर उत्साह और उमंग का वातावरण भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। यह आयोजन साधना, सेवा और आध्यात्मिक एकता के संदेश को जन–जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा।

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