सरकार ने केंद्रीय करों में हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया: सीतारमण

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (Agency)- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों को केंद्रीय करों में उनकी 41 प्रतिशत हिस्सेदारी का पूरा हस्तांतरण नहीं किए जाने संबंधी विपक्ष के आरोपों को बुधवार को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने विभाज्य कर पूल में से किसी भी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है।

लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “हम पर आरोप लगता है कि हम राज्यों की 41 प्रतिशत कर हिस्सेदारी का हस्तांतरण नहीं करते। मैं सदन के माध्यम से आश्वस्त करती हूं कि हमने केंद्रीय करों में राज्यों को मिलने वाली हिस्सेदारी में से किसी राज्य का हिस्सा नहीं घटाया है।”

वित्त मंत्री ने बताया कि 16वें वित्त आयोग ने 2018-19 से 2022-23 की अवधि का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकाला है कि केंद्र से राज्यों को मिलने वाला धन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है और इसमें कोई कटौती नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कुल कर हस्तांतरण 25.44 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में 2.07 लाख करोड़ रुपये अधिक है।

सीतारमण ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत केंद्र को उपकर (सेस) और अधिभार लगाने का अधिकार है और ये विभाज्य पूल का हिस्सा नहीं होते। ऐसे में राज्यों की हिस्सेदारी पर उपकर और अधिभार को लेकर लगाए जा रहे आरोप अनुचित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा वसूले गए उपकर का उपयोग भी राज्यों में अस्पताल, स्कूल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाता है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 53.47 लाख करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया है, जो चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 49.64 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.7 प्रतिशत अधिक है। वित्त वर्ष 2024-25 का बजट 46.52 लाख करोड़ रुपये का था।

उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य अगले वित्त वर्ष में 44.04 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त करना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आठ प्रतिशत अधिक है। पूंजीगत व्यय के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक प्रावधान किया गया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत है।

राजकोषीय अनुशासन पर जोर देते हुए सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत यानी 16.95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। घाटे के वित्तपोषण के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों के जरिये शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है। शेष संसाधन लघु बचत और अन्य स्रोतों से जुटाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करना राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) ढांचे का हिस्सा है। 2030-31 तक इसे एक प्रतिशत के उतार-चढ़ाव के साथ 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। 2026-27 में ऋण-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2025-26 के 56.1 प्रतिशत से कम है।

वित्त मंत्री ने देश में उर्वरकों की कमी के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है और इसके आयात के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।

राहुल गांधी के उस आरोप पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी जिसमें कहा गया था कि भारत ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में दबाव के आगे घुटने टेक दिए। केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू की टिप्पणी दोहराते हुए सीतारमण ने कहा, “कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो हमारे देश को बेच या खरीद सके।”

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने अपने कार्यकाल में विश्व व्यापार संगठन के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। अपने संबोधन में उन्होंने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी आलोचना की और कहा कि राज्य में “कानून नहीं, बम का राज” है।

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