नई दिल्ली/लखनऊ, 12 फरवरी 2026 – आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए कथित समझौते पर गंभीर सवाल उठाते हुए 14 फरवरी को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर समझौते की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन करेगी । पार्टी ने आरोप लगाया है कि यह समझौता देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ है तथा इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।
संजय सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के किसानों और आम जनता के हितों को ताक पर रखकर विदेशी दबाव में यह समझौता किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम देशहित से अधिक कुछ खास उद्योगपतियों के हितों को साधने के लिए रचा गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज, कृषि बाजार और स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी अंतरराष्ट्रीय डील को देश स्वीकार नहीं करेगा।
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इस समझौते के पीछे पारदर्शिता का अभाव है और सरकार ने संसद तथा देश की जनता को विश्वास में नहीं लिया। संजय सिंह ने कहा कि जिस तरह से हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ फाइलों और खुलासों को लेकर चर्चा हो रही है, उससे ध्यान हटाने और अपने करीबी उद्योगपतियों को बचाने के लिए सरकार देशहित से समझौता कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की नीतियां किसी व्यक्ति विशेष या उद्योगपति को बचाने के लिए नहीं बननी चाहिए।
आप सांसद ने कहा कि यह केवल आर्थिक समझौता नहीं बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और कृषि संरचना पर सीधा प्रहार है। इससे छोटे किसानों की आय पर असर पड़ेगा, स्थानीय बाजार विदेशी कंपनियों के लिए खोले जाएंगे और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस देश विरोधी नीति का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।
उन्होंने घोषणा की कि 14 फरवरी को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से इस समझौते की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे और महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर इस समझौते को तत्काल निरस्त करने की मांग करेंगे।
संजय सिंह ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने इस समझौते को वापस नहीं लिया तो आम आदमी पार्टी देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों, युवाओं और आम नागरिकों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वाली किसी भी नीति का पुरजोर विरोध किया जाएगा और देश की संपत्ति तथा नीति को निजी हितों की ढाल नहीं बनने दिया जाएगा।
