लखनऊ, 04 जून 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा लखनऊ के प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि बिजली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आमजन को निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए।
नैमिषारण्य स्थित वीवीआईपी गेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्री ने जनपद की विद्युत व्यवस्था, शिकायतों के निस्तारण और विभागीय कार्यप्रणाली की समीक्षा की। बैठक में महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ला, अमरेश कुमार, ओ.पी. श्रीवास्तव, जिलाधिकारी विशाख जी, मुख्य विकास अधिकारी तथा विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सुरेश खन्ना ने कहा कि बिजली आमजन से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण सेवा है और सरकार की सभी सुविधाओं का लाभ प्रत्येक उपभोक्ता तक समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पहुंचना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्युत संबंधी शिकायतों का तत्काल संज्ञान लेकर उनका शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की राजधानी होने के कारण लखनऊ की विद्युत व्यवस्था अन्य जनपदों के लिए उदाहरण होनी चाहिए। बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण और राजस्व हानि रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की कि कई क्षेत्रों में जूनियर इंजीनियर फोन नहीं उठाते, जिससे समस्याओं के समाधान में देरी होती है। इस पर नाराजगी जताते हुए मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जूनियर इंजीनियर जनप्रतिनिधियों के फोन हर हाल में रिसीव करें और यदि किसी कारणवश कॉल न उठा सकें तो बाद में स्वयं संपर्क कर समस्या का समाधान सुनिश्चित करें।
समीक्षा के दौरान जानकीपुरम क्षेत्र में गलत एस्टीमेट तैयार करने और पोल स्थापना में अनियमितता की शिकायत मिलने पर संबंधित जूनियर इंजीनियर को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा नगर निगम के ट्रांसफर स्टेशन और चार्जिंग स्टेशन को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध कराने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने को कहा गया।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि विद्युत विभाग एक आपातकालीन सेवा है और इसकी कार्यकुशलता में किसी प्रकार की कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को जनता और जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने तथा ऐसी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए जिससे लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
