प्रदेश सरकार की किसान-हितैषी नीतियों से समृद्धि की राह पर शाहजहाँपुर के गन्ना किसान

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में गन्ना फसल की महत्वपूर्ण भूमिका है और प्रदेश सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब जमीन पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। शाहजहाँपुर जनपद इसका एक प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है, जहाँ गन्ना विकास, समयबद्ध भुगतान, आधुनिक तकनीकों और डिजिटल सुविधाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

वर्तमान में शाहजहाँपुर में लगभग 1.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की जा रही है। जिले में रोजा, निगोही, पुवायाँ और तिलहर स्थित चार गन्ना विकास परिषदों के माध्यम से किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा रहा है। सहकारी गन्ना विकास समितियों के जरिए लगभग 1.96 लाख गन्ना आपूर्तिकर्ता किसानों को समय पर खाद, बीज और अन्य कृषि निवेश उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है।

जिले में वर्तमान में पाँच चीनी मिलें संचालित हैं। इनमें तिलहर और पुवायाँ की सहकारी चीनी मिलों के साथ निगोही, रोजा और मकसूदापुर की निजी चीनी मिलें शामिल हैं। इन मिलों में गन्ना खरीद, तौल और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है, जिससे किसानों का भरोसा और मजबूत हुआ है।

पेराई सत्र 2025-26 के दौरान शाहजहाँपुर की चीनी मिलों पर किसानों का कुल 1,029.11 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य देय हुआ। इसके मुकाबले अब तक 923.60 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का 89.75 प्रतिशत है। विशेष रूप से निगोही, रोजा, तिलहर और पुवायाँ चीनी मिलों ने किसानों का शत-प्रतिशत भुगतान पूरा कर दिया है। यह उपलब्धि समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी का सबसे बड़ा आधार प्रदेश सरकार की एस्क्रो अकाउंट व्यवस्था बनी है। इस व्यवस्था के तहत चीनी बिक्री से प्राप्त राशि का निर्धारित हिस्सा केवल गन्ना किसानों के भुगतान के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जाता है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है। साथ ही राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) में समय-समय पर की गई वृद्धि से किसानों की आय में भी इजाफा हुआ है।

गन्ना किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ परियोजना के तहत ई-गन्ना ऐप और ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके माध्यम से किसान घर बैठे गन्ना सर्वे, सट्टा, बेसिक कोटा, पर्ची निर्गमन और तौल संबंधी जानकारी मोबाइल पर प्राप्त कर रहे हैं। इससे पर्ची वितरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई है और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।

प्रदेश सरकार की एथेनॉल नीति ने भी गन्ना किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से बड़ा लाभ पहुंचाया है। गन्ने के रस और शीरे से एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों की आय में वृद्धि हुई है, जिससे किसानों को समय पर भुगतान करने की उनकी क्षमता मजबूत हुई है। साथ ही मिलों की पेराई क्षमता बढ़ने से खेतों में खड़े गन्ने की समय पर पेराई भी सुनिश्चित हो रही है।

आधुनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को ट्रेंच प्लांटर, रैटून मैनेजमेंट डिवाइस और अन्य कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा उच्च गुणवत्ता वाली, शीघ्र पकने वाली और रोग-प्रतिरोधी गन्ना प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ड्रिप सिंचाई अपनाने वाले किसानों को भी विशेष वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराने के लिए खांडसारी और गुड़ उद्योग को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। नई ऑनलाइन लाइसेंसिंग व्यवस्था से छोटे और मध्यम स्तर के प्रसंस्करण उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे किसानों को स्थानीय स्तर पर अपनी उपज बेचने का बेहतर अवसर मिल रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

शाहजहाँपुर में गन्ना विकास, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था और तकनीकी सुधारों का यह मॉडल दर्शाता है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। समयबद्ध भुगतान, आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था ने जिले के गन्ना किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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