मानसून सत्र आज से: परिसीमन पर सरकार-डीएमके की बढ़ती नजदीकियां, ‘वंदे मातरम् बिल’ समेत पांच अहम विधेयक होंगे पेश

नई दिल्ली, 20 जुलाई। संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। सत्र के पहले ही दिन सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक, महिला सुरक्षा, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा। इस बीच परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण कानून को लेकर सरकार और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) के बीच संभावित सहमति की चर्चाओं ने राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है।

सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने परिसीमन प्रक्रिया में सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में आनुपातिक आधार पर 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि सरकार इस सुझाव पर सकारात्मक रुख अपनाने को तैयार है। यदि इस मुद्दे पर सहमति बनती है तो संसद में सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए आवश्यक समर्थन मिल सकता है और दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचने का रास्ता आसान हो सकता है।

हालांकि डीएमके ने आधिकारिक तौर पर किसी समझौते से इनकार किया है। पार्टी सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और परिसीमन पर सरकार से अभी और स्पष्टता अपेक्षित है। इसके बावजूद राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ चुकी है।

रविवार को संसद सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार ने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में समर्थन मांगा। बैठक के बाद राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।

दो-तिहाई बहुमत का गणित

लोकसभा में कुल 544 सदस्य हैं और किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 363 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद शिवसेना (यूबीटी) के छह और एनसीपीआई के 20 सांसदों के समर्थन से सरकार का आंकड़ा 324 तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। यदि डीएमके के 22 और एनसीपी (शरद पवार) के आठ सांसदों का भी समर्थन मिलता है तो यह संख्या 354 हो जाएगी, जो आवश्यक बहुमत से मात्र नौ कम होगी।

सूत्रों के मुताबिक सरकार वाईएसआरसीपी, यूपीपीएल और पूर्वोत्तर के कुछ अन्य दलों से भी संपर्क बनाए हुए है। इन दलों का समर्थन मिलने पर सरकार दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय सांसदों के रुख और कुछ सदस्यों की अनुपस्थिति भी इस गणित में अहम भूमिका निभा सकती है।

पांच अहम विधेयक होंगे पेश

मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश करेगी। इनमें राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक सबसे अधिक चर्चा में है, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान पर कड़े दंडात्मक प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को इसे राज्यसभा में पेश कर सकते हैं।

इसके अलावा आयकर (संशोधन) विधेयक, सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास संशोधन विधेयक भी सरकार के विधायी एजेंडे में शामिल हैं।

हंगामेदार रहने के आसार

मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष जहां जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाने के प्रयास में रहेगी। ऐसे में संसद का यह सत्र कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और विधायी फैसलों का गवाह बन सकता है।

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