विधायक निधि के व्यय में नियमों का सख्ती से पालन हो: केशव प्रसाद मौर्य

लखनऊ, 16 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि (विधायक निधि) के अंतर्गत स्वीकृत धनराशि का व्यय निर्धारित नियमों, मार्गदर्शी सिद्धांतों और शासनादेशों के अनुरूप ही किया जाए।

उन्होंने कहा कि विधायक निधि की धनराशि स्वीकृत कर डीआरडीए के डिपॉजिट खाते में स्थानांतरित की जाएगी और उसका उपयोग तय दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होना चाहिए। साथ ही, वित्त विभाग द्वारा जारी मितव्ययिता संबंधी आदेशों और यूपी बजट मैनुअल के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।

उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में जीएसटी के वास्तविक देय आकलन के अनुसार ही धनराशि का व्यय किया जाए और कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की होगी।

वहीं, ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने विधायक निधि के प्रस्तावों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर अधिकतम 45 दिनों के भीतर स्वीकृति और आवश्यक कार्यवाही पूरी करना अनिवार्य होगा।

प्रमुख सचिव ने वर्ष 2018 के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद कार्यों का विभाजन, तकनीकी स्वीकृतियां और अन्य औपचारिकताएं तय समयसीमा में पूरी की जानी चाहिए। इसके लिए 3 मई 2018 को जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।

उन्होंने सभी मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से इन कार्यों की मॉनिटरिंग करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। विधायक निधि से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता पर लिया जाए।

सरकार का मानना है कि इस सख्ती से स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था और अन्य जनोपयोगी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी, जिससे आम जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।

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