लखनऊ, 24 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए ओबीसी और दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में वर्ष 2026-27 के सामान्य बजट से जुड़े प्रमुख प्रावधानों और विभागीय उपलब्धियों की जानकारी दी।
मंत्री कश्यप ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार अंत्योदय की भावना के साथ अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का बजट बढ़ाकर 3402 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। वहीं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का बजट 2140 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।
छात्रवृत्ति व्यवस्था में सुधार का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 से प्रदेश में कोई भी पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहा है। पहले जहां छात्रवृत्ति वितरण वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन होता था, वहीं अब वर्ष 2025 से 25 सितंबर से ही वितरण प्रारंभ कर दिया गया है। अब तक लगभग 20 लाख विद्यार्थियों को समयपूर्व छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किए जाने से लाखों नए विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, जबकि पूर्वदशम छात्रवृत्ति राशि 2250 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये कर दी गई है। वर्ष 2026-27 में लगभग 38 लाख छात्रों को इसका लाभ मिलने का अनुमान है।
गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह हेतु संचालित शादी अनुदान योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। योजना की आय सीमा अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 1 लाख रुपये वार्षिक तक कर दी गई है, जिससे अधिक परिवार सरकारी सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के 102 ओबीसी छात्रावासों के रखरखाव हेतु पहली बार 5 करोड़ रुपये अलग से स्वीकृत किए गए हैं, जिससे आधारभूत सुविधाओं में सुधार होगा। साथ ही ट्रिपल सी और ‘ओ’ लेवल कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के लिए भी बजट की व्यवस्था की गई है।
दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मासिक पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने का निर्णय लिया है। पेंशन मद में 1400 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के सभी 18 मंडलों में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां प्रारंभिक पहचान, उपचार और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए 7 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
दिव्यांग छात्राओं के लिए 60 करोड़ रुपये की नई ई-ट्राईसाइकिल योजना भी प्रारंभ की जा रही है, जिससे उनकी गतिशीलता और शिक्षा तक पहुंच आसान होगी। इसके अतिरिक्त कृत्रिम अंग और मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरण योजनाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी। मंत्री ने बताया कि चित्रकूट स्थित दिव्यांग विश्वविद्यालय, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 500 करोड़ रुपये है, अब राज्य सरकार के अधीन आ चुका है, जिससे दिव्यांगजनों की उच्च शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इन पहलों से सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी, शिक्षा और स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा तथा वंचित वर्गों के जीवन स्तर में ठोस सुधार संभव हो सकेगा।
