अयोध्या, 29 जून। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सोमवार को पूर्व निर्धारित न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने पर सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भ्रष्टाचार रोधी अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने किसी भी आरोपी की पुलिस रिमांड की मांग नहीं की, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ाने का आदेश दिया।
भ्रष्टाचार रोधी मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आरोपियों की पेशी हुई। विशेष अभियोजन अधिकारी उमेश दुबे ने बताया कि विवेचना कर रही एजेंसी की ओर से पुलिस रिमांड के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को अगले 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश पारित किया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी, पुलिस ने नहीं मांगी रिमांड; भ्रष्टाचार रोधी अदालत का आदेश
इससे पहले विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था, जिसकी अवधि सोमवार को समाप्त हो गई। ताजा आदेश के बाद अब सभी आरोपी आगामी 14 दिनों तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल में रहेंगे।
जांच कई पहलुओं पर जारी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के इस मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां दान राशि के संग्रह, गणना, बैंकिंग प्रक्रिया, लेखा-जोखा और धन के कथित गबन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही दान प्रबंधन प्रणाली और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
रिमांड नहीं मांगने पर भी चर्चा
सोमवार की सुनवाई में पुलिस द्वारा किसी भी आरोपी की रिमांड नहीं मांगे जाने को लेकर भी कानूनी हलकों में चर्चा रही। हालांकि, विवेचना जारी है और आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसी आगे अदालत से अनुमति लेकर अन्य कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद यह प्रकरण लगातार चर्चा में है। मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, दान प्रबंधन और अन्य संबंधित बिंदुओं की गहन जांच कर रही हैं। अदालत के ताजा आदेश के बाद सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे और मामले की अगली सुनवाई नियत तिथि पर होगी।
