राम मंदिर दान चोरी मामला: तीन आरोपी 40 घंटे की पुलिस रिमांड पर, बरामदगी और नए साक्ष्यों की होगी तलाश

अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से होगी गहन पूछताछ;

अयोध्या, 8 जुलाई। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित दान चोरी मामले की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन आरोपियों को अदालत से 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मिलने के बाद बुधवार सुबह पुलिस ने उन्हें जेल से अपनी अभिरक्षा में ले लिया। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से दान चोरी प्रकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों का खुलासा हो सकता है।

अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय से होगी गहन पूछताछ; दान की रकम, डिजिटल साक्ष्य और अन्य कड़ियों की जांच तेज

पुलिस ने बुधवार सुबह अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को जेल से कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। इससे पहले भी पुलिस अदालत की अनुमति से तीनों आरोपियों से जेल में पूछताछ कर चुकी थी। उस पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर अब पुलिस कई अहम कड़ियों को जोड़ने और नए साक्ष्य जुटाने में लगी है।

अदालत ने मंजूर की 40 घंटे की कस्टडी रिमांड

विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) की अदालत ने पुलिस की ओर से दायर रिमांड अर्जी पर सुनवाई करते हुए तीनों आरोपियों की 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की थी।

सुनवाई के दौरान मामले के विवेचक एवं क्षेत्राधिकारी (सीओ) अयोध्या आशुतोष तिवारी अदालत में उपस्थित रहे। पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपियों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं तथा उनकी निशानदेही पर नए साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य वस्तुओं की बरामदगी आवश्यक है।

वहीं, आरोपियों की ओर से नियुक्त अधिवक्ता कुलशेखर सिंह ने पुलिस की रिमांड अर्जी का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार करते हुए सीमित अवधि की कस्टडी रिमांड प्रदान कर दी।

दान की रकम और डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि कथित रूप से चोरी की गई दान राशि को कहां और किस प्रकार उपयोग किया गया, रकम किस-किस तक पहुंची, उसे कहां छिपाया गया तथा पूरे घटनाक्रम में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग गतिविधियों तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी गहन पड़ताल की जाएगी। पुलिस आरोपियों की निशानदेही पर संभावित बरामदगी और घटनास्थलों का सत्यापन भी कर सकती है।

पहले भी जेल में हुई थी पांच घंटे की पूछताछ

इससे पहले 5 जुलाई को अदालत की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों से जेल परिसर में लगभग पांच घंटे तक विस्तृत पूछताछ की थी। उस दौरान आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई थी।

सूत्रों के अनुसार, मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच में कई नई जानकारियां सामने आई थीं, जिनका प्रारंभिक सत्यापन भी किया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने कस्टडी रिमांड की मांग की थी।

एसआईटी जांच के बाद हुई थी गिरफ्तारी

राम मंदिर दान चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आठ आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।

इससे पहले पुलिस एक अन्य आरोपी अविनाश शुक्ला को भी कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ कर चुकी है, जिसके दौरान एक कार सहित अन्य सामान की बरामदगी की गई थी।

अब तीनों आरोपियों से होने वाली पूछताछ और संभावित बरामदगी को जांच की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कस्टडी रिमांड के दौरान प्राप्त होने वाले साक्ष्य इस पूरे प्रकरण की परतें खोलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, मामले की अंतिम तस्वीर एसआईटी की विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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