राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: टिन्नू यादव और मनीष यादव 39 घंटे की पुलिस रिमांड पर, कई ठिकानों पर होगी पूछताछ

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले में मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव को 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया है। एसआईटी और पुलिस की संयुक्त टीम दोनों से धन के कथित गबन, संपत्तियों में निवेश और पूरे नेटवर्क को लेकर पूछताछ करेगी।

अयोध्या, 18 जुलाई। अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला मामले की जांच निर्णायक चरण में पहुंच गई है। मामले के मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष यादव को शनिवार सुबह 39 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया। मेडिकल परीक्षण के बाद दोनों आरोपियों को विशेष जांच दल (एसआईटी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने पूछताछ के लिए एसओजी कार्यालय पहुंचाया।

शनिवार सुबह करीब 8:40 बजे दोनों आरोपियों को जिला कारागार से पुलिस लाइन स्थित अस्पताल लाया गया, जहां मेडिकल जांच के बाद उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया। इस दौरान टिन्नू यादव पूरे समय गमछे से अपना चेहरा ढके रहा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार रिमांड अवधि के दौरान दोनों आरोपियों को उन स्थानों पर भी ले जाया जा सकता है, जहां कथित तौर पर मंदिर में चढ़ाए गए दान की राशि का बंटवारा किया जाता था। जांच एजेंसियां उन संपत्तियों और ठिकानों की भी जांच करेंगी, जहां कथित रूप से चढ़ावे की रकम निवेश की गई। इनमें रियल एस्टेट परियोजनाएं, निर्माण कार्य, मकान, हॉस्टल और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं।

जांच का प्रमुख उद्देश्य नकदी, आभूषण, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी करना है, ताकि कथित धन के संग्रह, लेनदेन और उपयोग की पूरी श्रृंखला का पता लगाया जा सके।

इससे पहले तीन चरणों की पुलिस कस्टडी के दौरान छह आरोपियों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियों ने उस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, आभूषण और दो चारपहिया वाहन भी बरामद किए थे। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा और विस्तृत किया है।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मंदिर की दानपेटिका (हुंडी) की चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी। इसी आधार पर पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे की राशि का संग्रह, रखरखाव और वितरण किस प्रक्रिया के तहत होता था तथा उसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गबन की गई राशि किन परियोजनाओं या संपत्तियों में लगाई गई और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता रही है। अधिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि पूछताछ में नए नाम, वित्तीय लेनदेन या अन्य साक्ष्य सामने आते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

पुलिस का मानना है कि टिन्नू यादव और मनीष यादव से पूछताछ इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है, जिससे चढ़ावे की कथित हेराफेरी, धन के प्रवाह और पूरे नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

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