फतेहपुर,। जिले के खागा कोतवाली क्षेत्र में युवती के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद मामला अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। एक ओर पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे भाजपा नेता पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है, वहीं दूसरी ओर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
पुलिस के अनुसार, 24 अप्रैल को हुई इस घटना में एक युवती अपने मंगेतर के साथ घूमने गई थी, तभी कुछ युवकों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों में भाजपा से जुड़ा एक स्थानीय नेता भी शामिल बताया जा रहा है, जो घटना के बाद से फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
कांग्रेस का ज्ञापन, न्याय की मांग
घटना के विरोध में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन पर दबाव बनाते हुए डीएम और एसपी को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रत्याशी ओमप्रकाश गिहार, शिवाकांत तिवारी, मोहित मिश्रा, मिस्बाहुलहक और अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।
कांग्रेस नेताओं ने पीड़िता को शीघ्र न्याय दिलाने, दोषियों की गिरफ्तारी, कड़ी सजा और परिवार को सुरक्षा व मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि कार्रवाई में देरी होने पर आंदोलन किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया
पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेश द्विवेदी और शहर अध्यक्ष मो. आरिफ गुड्डा समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने लोधीगंज क्षेत्र में रोककर हिरासत में ले लिया। सभी को करीब पांच घंटे तक कोतवाली में रखा गया।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन विपक्ष की आवाज दबा रहा है और आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।
भाजपा नेताओं को भी रोका, हाउस अरेस्ट
दूसरी ओर, पीड़िता से मिलने जा रहे भाजपा नेताओं—जिलाध्यक्ष अन्नू श्रीवास्तव, विधायक कृष्णा पासवान, पूर्व मंत्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह और विधायक राजेंद्र पटेल—को भी पुलिस ने खागा कस्बे में रोक दिया। सभी को पीडब्ल्यूडी डाक बंगले में हाउस अरेस्ट कर लिया गया।
भाजपा नेताओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि अन्य दलों को जाने दिया जा रहा है तो उन्हें क्यों रोका गया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष
अपर पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश ने बताया कि क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों और संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों को एहतियातन रोका गया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की भीड़ या प्रदर्शन से हालात बिगड़ सकते थे, इसलिए यह कदम उठाया गया।
पुलिस ने यह भी बताया कि विभिन्न संगठनों के कई कार्यकर्ताओं को अलग-अलग स्थानों पर रोका गया, जिनमें कांग्रेस, किसान संगठनों और अन्य समूहों के लोग शामिल थे।
मामला बना राजनीतिक मुद्दा
घटना के बाद जिले में माहौल गर्म है और सभी दल पीड़िता को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं। वहीं प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है और मामले की जांच जारी है। वहीं पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सियासी सरगर्मी थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
