काले कपड़ों में संसद पहुंचा विपक्ष, राहुल-प्रियंका की अगुवाई में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

छात्र आंदोलन और विपक्षी नेताओं के साथ पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया और छात्रों से संवाद शुरू करने की मांग की।

नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026। छात्र आंदोलन और विपक्षी नेताओं के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुधवार को संसद परिसर में विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे और छात्रों की मांगों पर सरकार से बातचीत शुरू करने तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी शामिल हुए। सांसदों ने संसद परिसर में नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने और विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है।

प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि छात्र केवल अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं और सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सड़क और संसद दोनों जगह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है।

कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में ही कांग्रेस सांसद काले कपड़े पहनकर संसद पहुंचे हैं।

कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने इसे विपक्षी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध का प्रतीक बताते हुए कहा कि पार्टी ने इस दिन को “काला दिवस” के रूप में मनाने का फैसला किया है। वहीं कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और नैतिक आधार पर उन्हें इस्तीफा देना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन और उसके दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। संसद के मानसून सत्र के बीच इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

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