सुलतानपुर, 12 मई 2026 (यूएनएस)। सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले की सुनवाई अब 21 मई को होगी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान परिवादी पक्ष के अधिवक्ता ने पुराने आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दायर करने के लिए समय मांगा, जिस पर अदालत ने अंतिम अवसर प्रदान किया।
राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि मामले में अंतिम बहस होनी थी, लेकिन विपक्षी पक्ष ने स्थगन की मांग करते हुए कहा कि वह पुराने आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दायर करना चाहता है।
भाजपा नेता के वकील दायर करेंगे रिवीजन याचिका, कोर्ट ने दिया अंतिम मौका
वहीं परिवादी भाजपा नेता के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि वे साक्ष्यों के मिलान की प्रक्रिया को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले कोर्ट में राहुल गांधी के वॉयस सैंपल और सीडी में मौजूद आवाज के मिलान की मांग की थी, लेकिन उनकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। अब आदेश की सत्य प्रतिलिपि मिलने के बाद वे ऊपरी अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करेंगे।
गौरतलब है कि 2 मई को एमपी-एमएलए कोर्ट ने परिवादी पक्ष की ओर से दाखिल सीआरपीसी की धारा 311 के तहत दायर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था और मामले में अंतिम बहस के लिए 11 मई की तारीख तय की थी।
यह मानहानि मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा अक्टूबर 2018 में दर्ज कराया गया था। मामले में राहुल गांधी ने 20 फरवरी 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो मुचलकों पर जमानत दे दी गई थी।
बाद में 26 जुलाई 2024 को राहुल गांधी ने एमपी-एमएलए कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराते हुए खुद को निर्दोष बताया था और पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार दिया था। कोर्ट ने इसके बाद वादी पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, जिसके तहत लगातार गवाह पेश किए जाते रहे हैं।
इससे पहले भी राहुल गांधी ने सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपना बयान दर्ज कराया था। अदालत ने उनसे अपनी बेगुनाही के समर्थन में सफाई और साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा था, हालांकि उनके अधिवक्ता की ओर से कोई अतिरिक्त साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया।
