लखनऊ, 3 फरवरी – उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने राज्य में पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण पहल और योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देशी गाय का दूध अमृत है और राज्य सरकार द्वारा गायों के उन्नत नस्ल सुधार कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी ब्लॉकों में पशुओं के लिए पशुधन औषधि केंद्र खोले जाएंगे, जिनमें एथनोमेडिसिन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। गोवंश और अन्य पशुओं के उपचार हेतु पीपीपी मोड पर वेटनरी और पैरावेटनरी सेवाएं शुरू की जाएंगी, और पशुओं की जांच के लिए पैथालॉजी और पॉलीक्लिनिक केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
किसानों की सुविधा के लिए नई चारा नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत उन्हें चारे का बीज मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा।
सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि और पशुपालन पर आधारित है, और राज्य की लगभग 68 प्रतिशत जनसंख्या जीविकोपार्जन हेतु कृषि एवं पशुपालन कार्यों पर निर्भर है। पशुपालन क्षेत्र राज्य के प्राथमिक सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है। वर्ष 2017-18 में पशुजन्य पदार्थों का सकल मूल्यवर्धन 0.99 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये हो गया।
पशुगणना 2019 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में विशाल पशु संपदा है, जिसमें 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी और 4.09 लाख सूकर शामिल हैं। राज्य का दूध उत्पादन देश में प्रथम स्थान पर है और देश के कुल दुग्ध उत्पादन में 15.66 प्रतिशत योगदान देता है। दुग्ध उत्पादन वर्ष 2017-18 के 290.52 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 388.15 लाख मीट्रिक टन हो गया। अंडा उत्पादन भी 244 करोड़ से बढ़कर 611 करोड़ हो गया।
मंत्री ने वर्ष 2025-26 के लिए दुग्ध उत्पादन 447.83 लाख मीट्रिक टन, अंडा उत्पादन 7980.52 मिलियन, और ऊन उत्पादन 8.49 लाख किलोग्राम का लक्ष्य रखा। नस्ल सुधार कार्यक्रम के परिणामस्वरूप, विदेशी संकर और देसी गायों की दुग्ध उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट्स के माध्यम से पशुपालकों के द्वार तक सेवा पहुँचाने का प्रयास किया है, साथ ही पशुधन बीमा योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
गोवंश संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। वर्ष 2019 में पहली बार निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति लागू की गई और 2018-19 में 99.12 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो 2024-25 में बढ़कर 2454.58 करोड़ रुपये हो गए। वर्तमान में 7,497 गो आश्रय स्थलों में 12,38,847 गोवंश संरक्षित हैं।
मंत्री ने बताया कि पशुपालकों के लिए अनुदानित योजनाओं का बजट 2021-22 में 6.02 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 22.45 करोड़ रुपये किया गया है। यह योजना बकरी, भेड़, सूकर और बैकयार्ड कुक्कुट पालन के माध्यम से पशुपालकों की आय और पोषण स्तर में सुधार लाएगी।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि पशुपालन विभाग पशुस्वास्थ्य, सुरक्षा, रोग नियंत्रण, पशुपालकों की आर्थिक बेहतरी और राष्ट्रीय जीडीपी में योगदान सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
