एसआईआर में बड़े पैमाने पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों के नाम हटाए गए : अखिलेश यादव

लखनऊ, 16 फरवरी (RNN): उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और विशेष रूप से उनकी पार्टी के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस कथित धांधली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

सपा कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यादव ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएगी और निर्वाचन आयोग को विस्तृत ज्ञापन भी सौंपेगी। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा फॉर्म-7 के माध्यम से नाम हटाने की पहल केवल बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) द्वारा ही की जाए। इसके साथ ही उन्होंने संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ संख्या और फॉर्म जमा करने वाले व्यक्ति का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की भी मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र में 16 मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि बाबागंज विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर कथित जाली हस्ताक्षरों के आधार पर करीब 100 मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में फॉर्म-7 के दुरुपयोग के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित किए गए हैं।

यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी कई दिनों से ऐसे मामलों के प्रमाण और आंकड़े प्रस्तुत कर रही है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक योजनाबद्ध तरीके से उन क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है जहां समाजवादी पार्टी को चुनावी सफलता मिली थी।

भाजपा पर निशाना साधते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों—जैसे महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं—से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

समाजवादी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई तो वह लोकतांत्रिक मंचों पर इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाएगी। निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया का अब इंतजार किया जा रहा है, जबकि राज्य की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने के संकेत दे रहा है।

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