संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और अभिलेखों की जानकारी अब एक क्लिक पर

लखनऊ, 21 जून 2026 (यूएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया।

योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस, यूनिक प्रॉपर्टी आईडी और भू-आधार व्यवस्था पर मंथन

बैठक में प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन करते हुए नई धारा 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इन धाराओं के लागू होने पर संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो जाएगी, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकेगी।

प्रदेश सरकार का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की सभी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस पहचान संख्या को भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित मानचित्रण और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और उससे जुड़े अभिलेखों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध हो सकेगी।

सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाएगी। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय की भी बचत होगी।

भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि खंड को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर, अर्थात ‘भू-आधार’, प्रदान किया जाएगा। यह भू-संदर्भित पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल मंचों और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में सहायक होगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बने रहेंगे।

प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के अभिलेखों से भी जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने को आसान बनाएगी और कर संग्रहण प्रणाली को अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल शासन को नई मजबूती देगी, बल्कि सुगम जीवन और सुगम व्यापार की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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