मुसलमान ताकतवर होंगे तभी विकसित भारत बनेगा: ओवैसी

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (Agency) — एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को सरकार पर मुसलमानों से “नफरत” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब मुस्लिम समुदाय शैक्षणिक और सामाजिक रूप से सशक्त होगा।

लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान ओवैसी ने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक मुस्लिम बच्चों के नामांकन में गिरावट आई है और उनके पढ़ाई छोड़ने की दर भी अधिक है। उन्होंने कहा कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पिछले पांच वर्षों से अल्पसंख्यकों के लिए तीन छात्रवृत्ति योजनाओं को मंजूरी नहीं दी है।

ओवैसी ने कहा, “ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि मोदी सरकार मुसलमानों से नफरत करती है।” उन्होंने कहा कि सरकार 2047 तक विकसित भारत बनाने की बात करती है, लेकिन यह लक्ष्य तभी हासिल होगा जब मुसलमान भी शैक्षणिक रूप से ताकतवर होंगे।

उन्होंने बजट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए आवंटन बढ़ाकर 10 हजार करोड़ रुपये करने की मांग की। साथ ही अग्निपथ योजना की समीक्षा और चीन से जुड़े मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग भी की।

ओवैसी ने आतंकवादियों हाफिज सईद, मसूद अजहर और जाकिउर रहमान लखवी का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को “ऑपरेशन इंसाफ” चलाकर पाकिस्तान में घुसकर इन आतंकवादियों को पकड़कर लाना चाहिए।

बजट चर्चा में भाग लेते हुए आरएसपी के एन. के. प्रेमचंद्रन ने कहा कि इस बजट में दूरदृष्टि का अभाव है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन प्रस्ताव इस दिशा में पर्याप्त नहीं हैं। प्रेमचंद्रन ने कच्चे काजू पर आयात शुल्क हटाने की मांग की।

लद्दाख से निर्दलीय सांसद मोहम्मद हनीफा ने केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य ढांचे और कनेक्टिविटी के लिए अधिक बजट आवंटन की मांग की।

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी से भाजपा सांसद जयंत राय ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र की कई योजनाओं को लागू नहीं कर रही है, जिससे जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा।

भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत ने कहा कि बजट में आदिवासी, दलित, पिछड़े, किसान और मजदूर वर्ग के हितों का विशेष ध्यान नहीं रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति खराब है और केंद्र व राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती रहती हैं।

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