लखनऊ, 25 फरवरी (RNN) – आयकर विभाग ने उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बहुजन समाज पार्टी) के विधायक उमा शंकर सिंह के लखनऊ और बलिया स्थित परिसरों पर छापेमारी कर राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई बुधवार सुबह शुरू हुई और देर दोपहर तक जारी रही। विभाग के अधिकारियों ने फिलहाल छापेमारी के कारणों या बरामदगी के संबंध में कोई औपचारिक जानकारी साझा नहीं की है।
राजधानी लखनऊ तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित आवासों और संबंधित परिसरों पर एक साथ कार्रवाई की गई। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी में दस्तावेजों की जांच, डिजिटल उपकरणों की पड़ताल और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जाने की सूचना है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है।
उमा शंकर सिंह बलिया जिले के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं और राजनीति में आने से पहले निर्माण व्यवसाय से जुड़े रहे हैं। पिछले कुछ समय से उनके स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा रही है। सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान आवास के भीतर गतिविधियों को नियंत्रित रखा गया, हालांकि परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में ही जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री दिनेश सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विधायक गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और बीते दो वर्षों से उनका अधिकांश समय इलाज में व्यतीत हो रहा है। मंत्री ने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके सभी व्यवसाय लगभग बंद हैं और वे सार्वजनिक गतिविधियों में भी भाग नहीं ले पा रहे हैं।
दिनेश सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान चिकित्सा कर्मियों की आवाजाही पर रोक जैसी स्थिति उत्पन्न हुई, जो मानवीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है। उन्होंने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना कहा कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति के मामले में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।
दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व सीमित है। कुछ महीने पहले बसपा प्रमुख मायावती भी विधायक के लखनऊ स्थित आवास पर उनका हालचाल लेने पहुंची थीं, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर पार्टी स्तर पर चिंता स्पष्ट हुई थी।
फिलहाल आयकर विभाग की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही छापेमारी के कारणों, बरामद दस्तावेजों और संभावित कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। तब तक इस घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
