अप्रकाशित किताब विवाद पर जनरल नरवणे की सफाई: “मेरा नाम घसीटना उचित नहीं था”

नई दिल्ली। भारत के पूर्व थलसेना प्रमुख मनोज नरवणे ने अपनी अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अनावश्यक रूप से उनका हवाला देना और उन्हें सुर्खियों में लाना उचित नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस विवाद से आगे बढ़ चुके हैं।

एक साक्षात्कार में जनरल नरवणे ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने प्रकाशक से पुस्तक की समीक्षा होने तक इसके प्रकाशन को रोकने के लिए कहा था और वहीं यह मामला समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि अब वह इस विषय को पीछे छोड़ चुके हैं और तब से दो नई पुस्तकें लिख चुके हैं, जबकि तीसरी जल्द आने वाली है।

हाल ही में उनकी नई पुस्तक The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries का विमोचन हुआ, जिसमें भारतीय सेना से जुड़े कई रोचक किस्से और ऐतिहासिक तथ्य शामिल हैं।

जनरल नरवणे ने अपनी पुस्तक में “जय हिंद” अभिवादन की उत्पत्ति का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, इस अभिवादन की शुरुआत सबसे पहले भारतीय वायु सेना ने की थी, जिसे बाद में थलसेना और नौसेना ने भी अपनाया। उन्होंने बताया कि पहले सलामी के दौरान मौन रहने की परंपरा थी, जिसे समय के साथ विभिन्न अभिवादनों ने स्थान दिया।

संस्मरण विवाद के दौरान राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में इस अप्रकाशित पुस्तक के अंशों का उल्लेख करने की कोशिश की गई थी, जिसे नियमों के चलते रोका गया था।

अपनी पुस्तक में नरवणे ने कई प्रेरणादायक सैन्य कथाओं का भी जिक्र किया है। उन्होंने 1944 की कोहिमा की लड़ाई में शहीद हुए सैनिक बदलूराम की कहानी बताई, जिनके नाम पर उनकी मृत्यु के बाद भी राशन आता रहा, जिससे घिरे सैनिकों को मदद मिली। इस घटना से प्रेरित होकर “बदलूराम का बदन” गीत बना, जो आज भी असम रेजिमेंट में गाया जाता है।

इसके अलावा उन्होंने 1971 के युद्ध के दौरान पकड़े गए और बाद में अपनी यूनिट में लौटे “पेडोंगी” नामक सैन्य खच्चर की कहानी भी साझा की। नरवणे ने बताया कि इस खच्चर ने बारूदी सुरंगों वाले खतरनाक इलाके को पार कर अपनी यूनिट तक वापसी की, जो उसकी अद्भुत निष्ठा और साहस का उदाहरण है। बाद में उसे सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त किया गया और उसने 37 वर्षों तक सेवा दी।

जनरल नरवणे ने कहा कि इस तरह की कहानियां सेना के साहस, समर्पण और परंपराओं को दर्शाती हैं, जिन्हें जानना और समझना बेहद जरूरी है।

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