26 दिन बाद वांगचुक का अनशन समाप्त, सरकार ने माना कई मांगें; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गतिरोध कायम

नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चले अपने आमरण अनशन को समाप्त करने के बाद पहली बार विस्तार से बताया कि उन्होंने यह फैसला किन परिस्थितियों में लिया। वांगचुक ने कहा कि केंद्र सरकार के साथ दो दिनों तक चली बातचीत के बाद उन्हें कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिला, जिसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई तत्काल आश्वासन नहीं दिया गया।

दो दिन चली बातचीत, फिर मिला लिखित भरोसा

26 दिन बाद वांगचुक का अनशन समाप्त, सरकार ने माना कई मांगें; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गतिरोध कायम

अनशन समाप्त करने के बाद जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे। इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने भी उनसे मुलाकात कर या लिखित अपील भेजकर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था।

वांगचुक के अनुसार, सरकार के साथ पिछले दो दिनों में कई दौर की बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल मौखिक नहीं बल्कि लिखित आश्वासन की मांग की थी, जिसके कारण अनशन दो दिन और लंबा चला। अंततः सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया।

सरकार ने किन मांगों पर जताई सहमति

वांगचुक ने दावा किया कि सरकार ने तीन प्रमुख मुद्दों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले आंदोलनकारियों के विरुद्ध नए आपराधिक मामले दर्ज नहीं किए जाएंगे।

20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च में शांतिपूर्वक शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

नीट पेपर लीक प्रकरण के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सरकार सकारात्मक विचार करेगी।

संसद में परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर विस्तृत चर्चा कराने का भी आश्वासन दिया गया है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर नहीं बनी सहमति

वांगचुक ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी शामिल था, लेकिन सरकार इस संबंध में कोई स्पष्ट या समयबद्ध आश्वासन देने की स्थिति में नहीं थी।

उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चितकाल तक अनशन जारी रखकर अपने स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डालें, या फिर जिन मुद्दों पर सहमति बन चुकी है उन्हें स्वीकार करते हुए आगे का लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखें।

वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार भविष्य में भी इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं करती है तो उसका राजनीतिक नुकसान स्वयं सरकार को होगा।

“बच्चों पर मुकदमे न लगें, यही सबसे बड़ी प्राथमिकता थी”

सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण चिंता उन छात्रों और युवाओं का भविष्य था जो आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हो जाते हैं तो उनके करियर पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि लद्दाख में उन्होंने ऐसे कई युवाओं को देखा है जिनका भविष्य वर्षों तक मुकदमों और प्राथमिकी के कारण प्रभावित हुआ। इसलिए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सुरक्षा दिलाना उनके लिए प्राथमिकता थी।

सरकार के बयान में “शांतिपूर्वक” शब्द बना नया विवाद

हालांकि सरकार की ओर से जारी आश्वासन में एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई। सरकार ने कहा कि केवल उन प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी जिन्होंने आंदोलन में “शांतिपूर्वक” भाग लिया।

इस शब्द को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि जिन लोगों ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ या पुलिस पर हमले जैसी घटनाओं में भाग लिया है, उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। दिल्ली पुलिस पहले ही विभिन्न थानों में कई प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है और कथित हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।

योगेंद्र यादव ने उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने सरकार के बयान में शामिल “शांतिपूर्वक” शब्द पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार स्वयं तय करेगी कि कौन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी था और कौन नहीं, तो इस आश्वासन का वास्तविक अर्थ सीमित हो जाता है।

उन्होंने यह भी पूछा कि पहले से दर्ज प्राथमिकी का क्या होगा और क्या उन्हें वापस लिया जाएगा।

आंदोलन समाप्त नहीं, अगला चरण शुरू

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका व्यक्तिगत अनशन समाप्त हुआ है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही की मांग समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब इस संघर्ष का अगला चरण संसद में चर्चा, संस्थागत सुधार और लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से आगे बढ़ेगा।

नीट पेपर लीक विवाद के बीच वांगचुक का अनशन समाप्त होना आंदोलन का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार अपने लिखित आश्वासनों को किस प्रकार लागू करती है और संसद में शिक्षा सुधार तथा परीक्षा प्रणाली पर होने वाली चर्चा क्या दिशा तय करती है।

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