शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा उत्तर प्रदेश: राजनाथ सिंह

लखनऊ, 13 मार्च (RNN)। राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा, क्योंकि राज्य का ध्यान ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर है जिसमें बच्चे सकारात्मक माहौल में पढ़ सकें और आगे बढ़ सकें।

लखनऊ में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के गोल्फ सिटी परिसर के मुख्य भवन के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने कहा कि यहां के शिक्षण संस्थान न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए आकर्षण का केंद्र बनकर उभरेंगे।

सिंह ने कहा कि राज्य सरकार का ध्यान केवल नए स्कूल और कॉलेज खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा समन्वित वातावरण तैयार करने पर है जहां बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ सीखने के सकारात्मक माहौल में विकसित हो सकें।

उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा।”

लखनऊ से सांसद सिंह ने कहा कि राज्य व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है और पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे, निवेश, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

रक्षा मंत्री ने समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दूरदर्शी हस्तियों ने समाज के वंचित वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने का काम किया और यह दिखाया कि समाज में समानता तथा जागरूकता बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है।

उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ज्ञान की खोज में लगा रहा है और इसकी प्राचीन परंपरा में शिक्षा को केवल जानकारी प्राप्त करने का साधन नहीं बल्कि चरित्र निर्माण का माध्यम माना गया है। सिंह ने प्राचीन विश्वविद्यालयों तक्षशिला विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के दूर-दराज क्षेत्रों से छात्र यहां शिक्षा प्राप्त करने आते थे।

उन्होंने बताया कि चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेनसांग भी भारत आए थे, क्योंकि यहां शिक्षा में ज्ञान के साथ जीवन मूल्यों का भी समावेश होता है।

सिंह ने वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन, दुग्ध क्रांति के जनक वर्गीस कुरियन और वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महान व्यक्तियों ने पहले ज्ञान अर्जित किया और फिर उसे समाज के कल्याण के लिए समर्पित किया।

उन्होंने कहा कि स्कूल केवल ज्ञान देने की जगह नहीं बल्कि चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला है। यहां बच्चों को गणित, विज्ञान या भाषाओं के साथ-साथ जीवन के मूल्य भी सिखाए जाते हैं।

सिंह ने कहा कि बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके चरित्र निर्माण पर भी ध्यान देना आवश्यक है। उनके अनुसार अच्छी नौकरी, आकर्षक वेतन या किसी प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश ही जीवन की पूर्ण सफलता नहीं है, बल्कि सच्ची सफलता तब मिलती है जब कोई व्यक्ति अपने ज्ञान और विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम हो।

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