यूपी को मिले दो नए स्पोर्ट्स कॉलेज, 2026-27 सत्र से शुरू होगी पढ़ाई

लखनऊ, 05 मई 2026। उत्तर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सहारनपुर और फतेहपुर में दो नए स्पोर्ट्स कॉलेज शुरू करने का निर्णय लिया है। दोनों संस्थानों में शैक्षिक सत्र 2026-27 से पढ़ाई शुरू हो जाएगी।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में आधुनिक खेल सुविधाएं और पेशेवर प्रशिक्षण मिल सकेगा। ये दोनों परियोजनाएं लंबे समय से लंबित थीं, जिन्हें अब प्राथमिकता देकर पूरा कराया गया है।

लंबे समय से अटकी परियोजनाएं हुईं पूरी
फतेहपुर स्पोर्ट्स कॉलेज को वर्ष 2011 में स्वीकृति मिली थी और 2018 तक पूरा होना था, जबकि सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण 2013 तक पूरा होना था। विभिन्न कारणों से ये परियोजनाएं अधूरी रह गई थीं, जिन्हें अब पूरा कर नए सत्र से शुरू करने की तैयारी कर ली गई है।

अब पांच होंगे स्पोर्ट्स कॉलेज
इन दोनों नए कॉलेजों के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में स्पोर्ट्स कॉलेजों की संख्या बढ़कर पांच हो जाएगी। वर्तमान में गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज और मेजर ध्यान चंद स्पोर्ट्स कॉलेज संचालित हैं, जबकि बलिया में एक और स्पोर्ट्स कॉलेज का निर्माण जारी है।

कक्षा 9 से प्रवेश, कई खेलों में प्रशिक्षण
फतेहपुर और सहारनपुर दोनों स्पोर्ट्स कॉलेजों में कक्षा 9 से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। फतेहपुर में एथलेटिक्स, हॉकी, हैंडबॉल और कुश्ती जैसे खेल संचालित किए जाएंगे। यहां 80 सीटों पर प्रवेश होगा। जिसमें एथलेटिक्स रनर बालक के लिए 12, एथलेटिक्स जम्पर बालक के लिए 2, थ्रोवर बालक के लिए 4, हॉकी खिलाड़ी बालक के लिए 26, गोलकीपर बालक के लिए 4, कुश्ती बालक के लिए 10 और हैंडबॉल बालक के लिए 22 सीटें निर्धारित की गई हैं। सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज में भी 80 सीटों पर एडमिशन होंगे। यहां एथलेटिक्स रनर बालक के लिए 8, एथलेटिक्स जम्पर बालक के लिए 6, थ्रोवर बालक के लिए 6, हॉकी खिलाड़ी बालक के लिए 21, हॉकी गोलकीपर बालक के लिए 4, जूडो बालक के लिए 10, बॉक्सिंग बालक के लिए 15 और भारोत्तोलन बालक के लिए 10 सीटें तय की गई हैं।

खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा लाभ
इन कॉलेजों के शुरू होने से दूरदराज क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अब बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी खेल शिक्षा से जुड़ सकेंगे।

उत्तर प्रदेश खेल विभाग के सचिव सुहास एल.वाई. ने बताया कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करना है, ताकि खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उनके नजदीक ही उपलब्ध कराया जा सके।

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