अन्ना प्रथा से मुक्ति की ओर जालौन, ‘मिशन गौ-सेवा’ बना ग्रामीण समृद्धि का आधार

जालौन, 21 अप्रैल 2026। बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षों से किसानों के लिए अभिशाप बनी ‘अन्ना प्रथा’ अब जालौन में इतिहास बनती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मिशन गौ-सेवा’ ने न केवल निराश्रित गौवंश की समस्या का समाधान किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है।

कभी हालात ऐसे थे कि किसान दिन-रात अपनी फसलों की रखवाली के लिए मजबूर थे। आवारा पशुओं के कारण फसलें बर्बाद हो जाती थीं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। इस गंभीर समस्या को सरकार ने प्राथमिकता देते हुए जालौन में सुनियोजित रणनीति के साथ अभियान शुरू किया।

जिला प्रशासन ने ‘स्मार्ट गवर्नेंस’ और जमीनी स्तर पर सटीक पहचान के जरिए उन क्षेत्रों को चिन्हित किया, जहां निराश्रित गौवंश की समस्या सबसे अधिक थी। इसके बाद बड़े पैमाने पर गौशालाओं और अस्थायी आश्रय स्थलों की स्थापना की गई। वर्तमान में जनपद में 413 गौशालाओं में करीब 40 हजार गौवंशों को सुरक्षित रखा गया है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया गया है। गौशालाओं में लगे सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है, जिसकी मॉनिटरिंग कलेक्ट्रेट स्थित कंट्रोल रूम से होती है। इसके अलावा 82 नोडल अधिकारियों की तैनाती से जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।

‘मुख्यमंत्री सहभागिता योजना’ के तहत गौवंश को अपनाने वाले किसानों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, जिससे ‘गौ-सेवा’ को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इस पहल ने ग्रामीणों के बीच सहभागिता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया है।

जनभागीदारी इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। ‘मेरी गौशाला, मेरी जिम्मेदारी’ जैसे कार्यक्रमों ने ग्राम प्रधानों और स्थानीय नागरिकों को सीधे इस अभियान से जोड़ा है। हेल्पलाइन नंबर 05162-250288 के जरिए आम लोग भी इस व्यवस्था में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं।

इस पहल का सीधा असर किसानों की जिंदगी पर पड़ा है। खेतों में आवारा पशुओं की समस्या समाप्त होने से फसल उत्पादन बढ़ा है और किसानों को राहत मिली है। अब वे अपनी ऊर्जा अन्य उत्पादक कार्यों में लगा पा रहे हैं।

सरकार ने इस योजना को ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ से भी जोड़ा है। गौशालाओं से प्राप्त गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खाद और प्राकृतिक खेती में किया जा रहा है, जिससे भूमि की उर्वरता बढ़ने के साथ रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो रही है।

जालौन में ‘मिशन गौ-सेवा’ की सफलता यह दर्शाती है कि सही नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से वर्षों पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। आज यहां का किसान निश्चिंत होकर खेती कर रहा है और यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

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