ग्राम पंचायतों का कार्यकाल आज समाप्त, प्रधान छह माह तक बनेंगे प्रशासक

लखनऊ, 25 मई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2021 के सामान्य पंचायत चुनाव के बाद गठित ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। इस संबंध में पंचायती राज विभाग ने आदेश जारी करते हुए नई ग्राम पंचायतों के गठन तक अथवा अधिकतम छह माह के लिए निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है।

जारी आदेश के अनुसार उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा-12 की उपधारा 3 में यह व्यवस्था है कि कोई ग्राम पंचायत अपनी प्रथम बैठक की निर्धारित तिथि से पांच वर्ष तक ही अस्तित्व में रह सकती है। वहीं उपधारा 4 के तहत ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल भी पंचायत के कार्यकाल के साथ समाप्त माना जाएगा।

सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 12 की उपधारा 3-क के तहत अपरिहार्य परिस्थितियों अथवा लोकहित में यदि कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना संभव न हो, तो राज्य सरकार प्रशासनिक समिति अथवा प्रशासक नियुक्त कर सकती है। यह प्रशासक अधिकतम छह माह तक पद पर रह सकेगा और ग्राम पंचायत, प्रधान एवं समितियों की सभी शक्तियां उसके पास होंगी।

आदेश के अनुसार ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 27 मई से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को संबंधित ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में नामित किया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारियों को अधिकृत किया गया है। यह व्यवस्था नई ग्राम पंचायतों की प्रथम बैठक तक अथवा अधिकतम छह माह, जो भी पहले हो, तक प्रभावी रहेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासक कोई नीति संबंधी निर्णय नहीं लेंगे। वे केवल सामान्य और नियमित कार्यों का निर्वहन करेंगे। किसी अत्यावश्यक या विशेष परिस्थिति में नीति विषयक प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही निर्णय लिया जा सकेगा।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रामऔतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग में सेवानिवृत्त अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा के साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया है।

यह आयोग अति पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर अपनी रिपोर्ट छह माह के भीतर सरकार को सौंपेगा। इसके बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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