कुतुब मीनार से भी तीन गुना ऊंचा मंदिर तैयार, अखिलेश ने किया था शिलान्यास; प्रधानमंत्री कर सकते हैं लोकार्पण

मथुरा/वृंदावन। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बन रहा देश का सबसे विशाल और ऊंचा चंद्रोदय मंदिर अब लगभग तैयार हो चुका है। इस भव्य मंदिर का लोकार्पण इस माह के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते हैं। मंदिर प्रबंधन की ओर से उन्हें आमंत्रण भेजा गया है, जबकि उद्घाटन की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।

यह मंदिर दिल्ली की कुतुब मीनार से लगभग तीन गुना ऊंचा बताया जा रहा है, जिससे इसकी भव्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

शिलान्यास और निर्माण

वृंदावन-छटीकरा मार्ग स्थित अक्षय पात्र परिसर में इस मंदिर का शिलान्यास वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। उसी वर्ष पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इसकी आधारशिला रखी थी।

करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से इस्कॉन द्वारा निर्मित यह मंदिर लगभग 12 वर्षों में तैयार हुआ है। यह 70 मंजिला संरचना है और अपनी ऊंचाई के कारण विश्वस्तरीय पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

प्रधानमंत्री के दौरे की संभावना

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई के अंतिम सप्ताह में 25 से 30 तारीख के बीच मथुरा आ सकते हैं। उनके संभावित दौरे को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। गर्भगृह में पूजा-अर्चना के साथ-साथ एक विशेष मंच भी तैयार किया जा रहा है, जहां से प्रधानमंत्री जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। हालांकि अभी प्रधानमंत्री कार्यालय से कार्यक्रम को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है।

मजबूत नींव और ऊंचाई

मंदिर की प्रस्तावित ऊंचाई लगभग 210 मीटर है। इसके लिए 55 मीटर गहरी नींव बनाई गई है, जो इसे अत्यंत मजबूत बनाती है। तुलना के लिए, दुबई की प्रसिद्ध इमारत बुर्ज खलीफा की नींव लगभग 50 मीटर गहरी है।

टेलीस्कोप से दिखेगा ताजमहल

इस गगनचुंबी मंदिर की ऊंचाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके शीर्ष पर लगाए जाने वाले टेलीस्कोप से ताजमहल को देखा जा सकेगा, जो यहां से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है।

आधुनिक और पारंपरिक शैली का संगम

मंदिर का निर्माण द्रविड़, नागर और आधुनिक वास्तुकला के मिश्रण से किया जा रहा है। प्रारंभिक तीन मंजिलों पर चैतन्य महाप्रभु, राधा-कृष्ण और बलराम के मंदिर स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 4डी तकनीक के माध्यम से भक्तों को देव लोक और धार्मिक कथाओं का अनुभव कराया जाएगा।

मंदिर परिसर में प्राकृतिक वन जैसा वातावरण विकसित किया गया है। साथ ही यमुना नदी का प्रतिरूप बनाकर नौका विहार जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस भव्य परियोजना के पूरा होने के साथ ही वृंदावन एक प्रमुख वैश्विक धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त होकर उभरेगा।

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