चालक-परिचालकों की सवारी से ज्यादा लगेज में रुचि, स्टाफ की कमी और संचालन व्यवस्था से बढ़ी परिवहन निगम की मुश्किलें
लखनऊ, 10 जुलाई। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) पर प्रदेश ही नहीं, दूसरे राज्यों तक यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है। परिवहन मंत्री और निगम के वरिष्ठ अधिकारी लगातार व्यवस्था सुधारने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई खामियों के कारण रोडवेज बसें यात्रियों को आकर्षित करने में पीछे छूटती दिखाई दे रही हैं। दूसरी ओर निजी बसें, ऑटो और अन्य व्यावसायिक वाहन यात्रियों से खचाखच भरे नजर आते हैं।
परिवहन निगम के बेड़े में करीब 11,263 बसें शामिल हैं, लेकिन स्टाफ की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 5 जुलाई को 830 बसों का संचालन नहीं हो सका, जिनमें से 420 बसें केवल चालक उपलब्ध न होने के कारण खड़ी रहीं। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
महिला परिचालकों की भर्ती भी अधूरी
लखनऊ में महिला रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 81 महिला परिचालकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन अब तक केवल 22 ने ही कार्यभार ग्रहण किया है, जबकि 59 नियुक्त अभ्यर्थियों ने जॉइन नहीं किया। इससे भी बस संचालन प्रभावित हो रहा है।
रोडवेज बसें खाली, प्राइवेट वाहन यात्रियों से भरे
राजधानी लखनऊ के पॉलीटेक्निक चौराहा, कमता और अन्य प्रमुख चौराहों पर अक्सर यह स्थिति देखने को मिलती है कि निजी वाहन खुलेआम यात्रियां भरते रहते हैं, जबकि रोडवेज बसों को रुकने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। यात्रियों का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में भी निजी वाहनों को सवारी भरने की छूट रहती है, जबकि रोडवेज बसों को तुरंत आगे बढ़ा दिया जाता है।
कई यात्रियों का कहना है कि बाराबंकी से आने वाली बसें अवध बस अड्डे तक तो पहुंचती हैं, लेकिन वापसी में कई बसें बस अड्डे में प्रवेश किए बिना सीधे चिनहट की ओर निकल जाती हैं। ऐसे में कमता और आसपास के यात्रियों को मजबूर होकर निजी बसों या ऑटो का सहारा लेना पड़ता है।
लगेज ढुलाई पर अधिक जोर
यात्रियों का आरोप है कि कई चालक और परिचालक यात्रियों की बजाय लगेज ढुलाई में अधिक रुचि दिखाते हैं। आरोप यह भी है कि कई बार सामान तो बसों में ले जाया जाता है, लेकिन उसका विधिवत बुकिंग रिकॉर्ड नहीं बनाया जाता। इससे परिवहन निगम को संभावित राजस्व का नुकसान होने की आशंका रहती है।
आरक्षित श्रेणी के यात्रियों की भी शिकायतें
कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि बाराबंकी डिपो की बसों में आरक्षित श्रेणी के यात्रियों को निर्धारित सीट उपलब्ध कराने में भी लापरवाही बरती जाती है। यात्रियों के अनुसार कई बार परिचालकों का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं रहता।
सुधार की जरूरत
परिवहन निगम समय-समय पर चालक-परिचालकों के प्रशिक्षण और स्वास्थ्य परीक्षण जैसे कार्यक्रम संचालित करता है, लेकिन यात्रियों का मानना है कि सेवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है।
प्रदेश में सबसे बड़ा बस नेटवर्क होने के बावजूद यदि यात्रियों को निजी वाहनों का विकल्प चुनना पड़ रहा है, तो यह संचालन व्यवस्था, स्टाफ की उपलब्धता और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यात्रियों का कहना है कि यदि बसों का नियमित संचालन, निर्धारित स्टॉप पर ठहराव और बेहतर व्यवहार सुनिश्चित किया जाए तो रोडवेज एक बार फिर यात्रियों की पहली पसंद बन सकता है।
