राजधानी पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद,बोले, गौ माता के सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी

लखनऊ,08 जुलाई 2026 (यूएनएस)। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती राजधानी लखनऊ पहुंचे हैं। यहां वह 81 दिन के अपने गोविधि (गोरक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा के तहत आए हैं। सबसे पहले उन्होंने माता चंद्रिका देवी मंदिर में दर्शन-पूजन किया। शहर के अलग-अलग इलाकों में भक्त उनका स्वागत कर रहे हैं। वह फैजुल्लागंज में भजन संध्या कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। पूरे दिन शहर के पांच विधानसभा क्षेत्रों से उनकी यात्रा गुजरेगी।

इस दौरान उनके स्वागत में पूजा और धर्मसभाओं का आयोजन किया गया है। शंकराचार्य ने बताया कि 3 मई 2026 को गोरखपुर से शुरू हुई गविष्ठि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा उत्तर प्रदेश की 403 में से 300 से अधिक विधानसभाओं से होकर गुजर चुकी है। 23 जुलाई को यात्रा लखनऊ पहुंचेगी और 24 जुलाई को दोपहर 12 बजे आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति उपवन मैदान में 2,18,700 धर्म सैनिकों के साथ श्गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्पश् आयोजित कर गौमाता की रक्षा के लिए धर्मयुद्ध की औपचारिक घोषणा की जाएगी। गौधाम निर्माण और अभियान के संचालन के लिए शंकराचार्य ने बक्शी का तालाब विधानसभा में यशवीर लोधी को अपना प्रतिनिधि और शहजादे अहमद को सह-प्रतिनिधि नियुक्त किया।

उन्होंने दोनों से मिलकर गौ संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। अभियान के लिए अलग से बैंक खाते की जानकारी भी उनके कार्यालय की ओर से जारी किए जाने की बात कही गई। शंकराचार्य ने घोषणा की कि 24 जुलाई के कार्यक्रम का नाम गौ गर्जन अक्षौहिणी संकल्प होगा। उन्होंने कहा कि इस दिन गौमाता की रक्षा के लिए एक विशाल जनसमूह सिंह गर्जना के साथ संकल्प लेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर अधर्म हो रहा है और गौ को अब भी पशु मानकर कानूनों के तहत रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को ऐसे सभी मुद्दों को जनता के सामने रखा जाएगा। शंकराचार्य ने बताया कि उनके संगठन के चार अंग हैं, तन, मन, धन और जन। जो समय दे सकते हैं, वे तन से सहयोग करें। विद्वान, लेखक और कलाकार मन से सहयोग दें।

आर्थिक सहयोग करने वाले धन अक्षौहिणी से जुड़ें और जो स्वयं मैदान में आ सकते हैं, वे जन अक्षौहिणी का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि जनता का सामूहिक गर्जन भी अधर्म के खिलाफ बड़ी शक्ति बनेगा। शंकराचार्य ने कहा कि 24 जुलाई को लखनऊ में धर्म के पक्ष में खड़े लोगों की गिनती होगी। शास्त्रों के अनुसार एक अक्षौहिणी सेना में 2,18,700 लोग होते हैं और उनका लक्ष्य इतनी ही संख्या में धर्म सैनिकों को एकत्र करना है। उन्होंने कहा कि यदि यह संख्या पूरी नहीं हुई तो सेना का पुनर्गठन किया जाएगा। उन्होंने लोगों से धर्म सैनिक के रूप में पंजीकरण कराने और अधिक से अधिक लोगों को साथ लाने का आह्वान किया।

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