राम मंदिर दान घोटाला: सीसीटीवी से छेड़छाड़ के संकेत, 1250 कीमती शिलाओं के गायब होने का दावा, एसआईटी जांच में रोज नए खुलासे

Ram Mandir donation scam: Signs of CCTV tampering, claims of 1,250 precious stone slabs going missing; new revelations emerge daily in the SIT probe.

अयोध्या, 18 जून 2026 (RNN)। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दानराशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को तीसरे दिन भी कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि दान पेटियों से धन और कीमती वस्तुएं निकालने के बाद सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ की गई हो सकती है। इस बीच दानराशि के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, बैंकिंग प्रक्रिया और ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

एसआईटी सोमवार से अयोध्या में डेरा डाले हुए है। पहले दिन करीब साढ़े सात घंटे और दूसरे दिन 11 घंटे तक जांच के बाद बुधवार को भी टीम सुबह से मंदिर परिसर में मौजूद रही। जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी, पुजारी और बैंक कर्मियों से पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार सीसीटीवी कैमरों की स्थिति और रिकॉर्डिंग सिस्टम की गहन जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे फुटेज के साथ छेड़छाड़ की आशंका मजबूत हुई है।

जांच एजेंसी अब तक करीब 125 लोगों से पूछताछ कर चुकी है, जबकि लगभग 200 लोगों की सूची तैयार की गई है। कई लोगों से एक से अधिक बार पूछताछ की गई है। सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के कुछ जिम्मेदार पदाधिकारी कई महत्वपूर्ण सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वहीं दान से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां और अस्पष्टताएं मिली हैं, जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।

Ram Mandir donation scam: Signs of CCTV tampering, claims of 1,250 precious stone slabs going missing; new revelations emerge daily in the SIT probe.

एसआईटी ने इस मामले में पकड़े गए पांच संदिग्धों से भी पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इनके बयानों में कई अन्य नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की अब जांच की जा रही है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच के दौरान ही एफआईआर दर्ज की जाएगी या अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमा कायम होगा।

जांच में बैंक की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। दानराशि की गिनती बैंक कर्मियों की मौजूदगी में होती थी। शुरुआती जांच में बैंक स्तर पर निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही के संकेत मिले हैं। हालांकि कुछ बैंक कर्मियों का कहना है कि वे ट्रस्ट पदाधिकारियों के प्रभाव और दबाव के कारण हस्तक्षेप नहीं कर पाते थे।

मामले को लेकर देश के कई पूर्व पुलिस अधिकारियों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने इसे सामान्य अपराध नहीं बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर आपराधिक कृत्य बताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। वहीं पूर्व डीजीपी ए.के. जैन का कहना है कि यदि दानराशि के गबन के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

जांच के दौरान ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। इन दस्तावेजों से पता चला है कि एक अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, निजी सुरक्षा कर्मी और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद दान पेटियों से चोरी और गड़बड़ी के आरोप सामने आने से सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

Ram Mandir donation scam: Signs of CCTV tampering, claims of 1,250 precious stone slabs going missing; new revelations emerge daily in the SIT probe.

ट्रस्ट की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार 11 माह में मंदिर को विभिन्न माध्यमों से लगभग 83 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। इसमें दान पेटियों से 55 करोड़ रुपये, दान काउंटरों से 18 करोड़ रुपये, ऑनलाइन माध्यम से 8 करोड़ रुपये, विदेशी श्रद्धालुओं से 78 लाख रुपये और अन्य स्रोतों से आय शामिल है। इसी अवधि में ट्रस्ट को विभिन्न बैंक खातों और निवेशों पर लगभग 138 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में भी प्राप्त हुए।

खर्च के मद में मंदिर निर्माण पर 152 करोड़ रुपये, परकोटा और दीवार निर्माण पर 87 करोड़ रुपये, भोग-प्रसाद पर 11 करोड़ रुपये, अन्न भंडार पर 8 करोड़ रुपये, कर्मचारियों के वेतन पर 7.67 करोड़ रुपये तथा बिजली मद में 3.68 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा यात्री सुविधा केंद्र, अस्पताल और अन्य सुविधाओं के लिए भूमि खरीद पर 26.69 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इसी बीच जमीन खरीद में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट ने कई जमीनें बाजार और सरकारी मूल्यांकन से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दानराशि विवाद के बीच एक और बड़ा दावा सामने आया है। धर्मसेना के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतोष दुबे ने आरोप लगाया है कि सोने, चांदी, हीरे और अष्टधातु से निर्मित 1250 पूजित श्रीराम शिलाएं गायब हैं। उनका दावा है कि ये शिलाएं मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से एकत्र कर कारसेवकपुरम में रखी गई थीं। अब वहां केवल मिट्टी की शिलाएं बची हैं, जबकि कीमती शिलाओं का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

संतोष दुबे ने इस संबंध में पुलिस को तहरीर भी दी है और ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन दावों की सत्यता की पड़ताल कर रही हैं।

उधर, मामले में चर्चा में आए रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास कोई अवैध संपत्ति नहीं है और यदि जांच में कोई अनधिकृत संपत्ति पाई जाती है तो उसे रामलला को समर्पित कर दिया जाएगा।

एसआईटी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट में किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है और क्या इस पूरे प्रकरण में आपराधिक मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *