वंदे मातरम् के अपमान पर अब होगी 3 साल तक की जेल, राज्यसभा से राष्ट्र गौरव संशोधन विधेयक 2026 पारित

राज्यसभा ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए कानून के तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालना या उसका अपमान करना दंडनीय अपराध होगा, जिसके लिए तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।

नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026। संसद ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यसभा से ध्वनिमत से पारित कर दिया। अब राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या उसका अपमान करना आपराधिक अपराध माना जाएगा, जिसके लिए तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।

विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा के बाद मतदान हुआ। उस समय कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सदस्य गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति और अन्य मुद्दों पर विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर चुके थे।

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि यह विधेयक देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति और आजादी के संघर्ष का सबसे प्रेरक उद्घोष था, लेकिन आजादी के बाद इसे वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसका यह हकदार था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रगीत के केवल दो अंतरों को ही आधिकारिक मान्यता दी गई और सरकारी कार्यक्रमों में भी केवल उन्हीं का उपयोग किया जाता रहा। नित्यानंद राय ने कहा कि स्वतंत्र भारत के पहले दिन तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के निर्देश पर प्रख्यात गायक पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने आकाशवाणी से पूरा वंदे मातरम् प्रस्तुत किया था।

1971 के कानून में होगा संशोधन

यह विधेयक राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है। अब तक इस कानून में राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय माना गया था, जबकि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के संबंध में स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं था। संशोधन के बाद राष्ट्रगीत के गायन को बाधित करना, उसका अपमान करना या ऐसे आयोजन में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करना भी अपराध की श्रेणी में आएगा।

संविधान सभा का भी किया गया उल्लेख

विधेयक के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि वंदे मातरम् को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान और समान दर्जा प्राप्त होगा। सरकार का कहना है कि उसी भावना को कानूनी संरक्षण देने के लिए यह संशोधन लाया गया है।

क्या होगा दंड?

संशोधित कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालता है, उसका अपमान करता है या ऐसे कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकेगा। दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान किया गया है।

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