लखनऊ, 16 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार ने यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर फेज-2 बस स्टेशन विकास परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत प्रदेश के 49 बस स्टेशनों का पुनर्विकास कर उन्हें आधुनिक, विश्वस्तरीय और बहुउद्देशीय बस टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत बनाए जाने वाले बस टर्मिनलों में यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इनमें अत्याधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र, डिजिटल सूचना प्रणाली, सुव्यवस्थित पार्किंग, वाणिज्यिक परिसर और अन्य सहायक सेवाएं शामिल होंगी। साथ ही स्मार्ट और टिकाऊ अवसंरचना का विकास भी किया जाएगा।
परियोजना को डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार को कोई प्रत्यक्ष पूंजीगत व्यय नहीं करना होगा। निजी निवेश के माध्यम से इन बस स्टेशनों का निर्माण और संचालन किया जाएगा, जबकि भूमि का स्वामित्व नगर निगम के पास रहेगा।
सरकार का मानना है कि इस योजना से न केवल यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और गुणवत्तापूर्ण परिवहन सेवाएं मिलेंगी, बल्कि रोजगार सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
फेज-2 के तहत जिन 49 बस स्टेशनों का पुनर्विकास किया जाएगा, उनमें प्रमुख रूप से अकबरपुर, अमेठी, अयोध्या, रसड़ा, बेल्थरा रोड, बलरामपुर, बस्ती, बदायूं, बुलंदशहर, खुर्जा, देवरिया, एटा, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, नोएडा, गढ़, लोनी, गोंडा, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, मछलीशहर, बादशाहपुर, झांसी, माती, सराय अकिल, गोला, जानकीपुरम, कैसरबाग, सोनौली, निचलौल, विंध्याचल, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पीलीभीत, रामपुर, भिनगा, नैमिषारण्य, सिधौली, रॉबर्ट्सगंज, जगदीशपुर, उन्नाव और चंदौली जैसे शहर शामिल हैं।
यह परियोजना उत्तर प्रदेश को आधुनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ यात्रियों के अनुभव को भी बेहतर बनाएगी।
