नयी दिल्ली, 13 मार्च (RNN)। देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर शुक्रवार को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने इस मुद्दे पर विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।
यह प्रतिक्रियाएं नरेन्द्र मोदी के उस बयान के बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने एलपीजी की उपलब्धता को लेकर “घबराहट की स्थिति पैदा करने वालों” पर निशाना साधा था और राज्य सरकारों से सिलेंडर की कालाबाजारी तथा जमाखोरी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने को कहा था।
मोदी ने गुरुवार को यहां ‘एनएक्सटी समिट’ को संबोधित करते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट से कोई भी देश अछूता नहीं है, लेकिन भारत इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
इस बीच मिलिंद देवरा ने प्रधानमंत्री और सरकार का समर्थन करते हुए इस मुद्दे के राजनीतिकरण की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि जब विदेश मंत्री और पेट्रोलियम मंत्री पहले ही सदन के माध्यम से पश्चिम एशिया की अस्थिरता और वहां जारी संघर्ष के बीच भारत की रणनीति स्पष्ट कर चुके हैं, तब इस विषय पर घबराहट और डर का माहौल बनाना देश के हित में नहीं है।
देवरा ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट होना चाहिए और इसे अवसर में बदलने के बारे में सोचना चाहिए।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। हालांकि उन्होंने खाड़ी देशों से संपर्क साधने और शांति के प्रयासों के लिए केंद्र सरकार की पहल का स्वागत भी किया।
थरूर ने कहा कि कई घरों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, लोग गैस सिलेंडर की जगह लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सिलेंडर आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं, तो यह एक बड़ी समस्या बन सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर गैस की कमी के कारण रेस्तरां भी बंद होने लगे हैं।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि सरकार को आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मांग के अनुसार गैस मिल सके।
वहीं सौगत रॉय ने भी स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि एलपीजी की कमी के कारण छात्रों और होटलों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और हालात को सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।
गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सहयोगी पार्टी है।
