एनसीआर में प्रदूषण पर बड़ा प्रहार: 1.09 लाख पुराने ट्रक-बस होंगे बाहर, बीएस-6 और ई-वाहनों को मिलेगा प्रोत्साहन

नई दिल्ली, 25 जून। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने बीएस-4 और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले व्यावसायिक वाहनों के प्रतिस्थापन को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद एनसीआर क्षेत्र में संचालित 1.09 लाख से अधिक पुराने ट्रक और बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में 22 जून को हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजा शेखर वुंडरू ने गुरुवार को इसकी अधिसूचना जारी की।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस नीति के दायरे में 93,458 ट्रक और 16,329 बसें आती हैं। यानी कुल 1,09,787 व्यावसायिक वाहनों को नई व्यवस्था के तहत बदला जाएगा। सरकार का मानना है कि पुराने डीजल वाहनों को हटाने से एनसीआर में प्रदूषण के स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

अधिसूचना के तहत बीएस-3 और उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रकों और बसों को अनिवार्य रूप से अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों पर भेजना होगा। वहीं बीएस-4 वाहनों के मालिकों को राहत देते हुए उन्हें एनसीआर से बाहर संचालन या अन्य राज्यों में बिक्री का विकल्प दिया गया है।

सरकार ने स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नई खरीद पर विशेष प्रोत्साहन भी घोषित किए हैं। पुराने वाहनों के बदले बीएस-6, इलेक्ट्रिक या सीएनजी आधारित नए व्यावसायिक वाहन खरीदने पर मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। यह रियायत अगले 10 वर्षों तक प्रभावी रहेगी। इसके अलावा पंजीकरण शुल्क में भी छूट का लाभ दिया जाएगा।

योजना का लाभ केवल उन वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके वाहन हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र के जिलों में पंजीकृत हैं। नया वाहन भी इन्हीं जिलों में पंजीकृत कराना अनिवार्य होगा। कर और पंजीकरण शुल्क में छूट केवल बीएस-6, इलेक्ट्रिक और सीएनजी श्रेणी के वाहनों पर लागू होगी।

सरकार ने योजना में शामिल पात्र वाहन मालिकों को एक वर्ष से अधिक समय से लंबित कुछ देनदारियों में राहत देने का भी प्रावधान किया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे अधिक संख्या में वाहन मालिक पुराने वाहनों को बदलने के लिए आगे आएंगे और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

हरियाणा सरकार का कहना है कि यह पहल न केवल एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी, बल्कि स्वच्छ ईंधन आधारित परिवहन प्रणाली को भी नई गति प्रदान करेगी। इससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ आधुनिक और टिकाऊ परिवहन नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकेगा।

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