लखनऊ SCR को मिलेगी विकास की नई रफ्तार, 300 किमी आउटर रिंग रोड से लेकर नमो भारत कॉरिडोर तक मेगा प्लान तैयार

कानपुर से अयोध्या तक दौड़ेगी रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम ट्रेन, रिंग रेल और औद्योगिक क्षेत्रों से बढ़ेंगे निवेश और रोजगार के अवसर

लखनऊ, 11 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों को एकीकृत विकास की नई दिशा देने के लिए स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। योजना के तहत SCR क्षेत्र में 300 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड, 187 किलोमीटर लंबा नमो भारत कॉरिडोर और 151 किलोमीटर लंबी रिंग रेल परियोजना विकसित की जाएगी।

सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से लखनऊ और आसपास के जिलों में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही रायबरेली के बछरावां और हरदोई के संडीला को विस्तारित औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना भी तैयार की गई है।

कानपुर से अयोध्या तक बनेगा नमो भारत कॉरिडोर

SCR में हाई स्पीड रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इसके तहत कानपुर के नयागंज से अयोध्या तक 187 किलोमीटर लंबा नमो भारत कॉरिडोर बनाया जाएगा।

करीब 32 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।

पहला चरण

पहले चरण में नयागंज (कानपुर) से लखनऊ के अमौसी तक करीब 67 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।

दूसरा चरण

दूसरे चरण में अमौसी से अयोध्या तक का हिस्सा पूरा किया जाएगा।

इस रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें—

  • नयागंज
  • उन्नाव
  • बशीरतगंज
  • नवाबगंज
  • बांगर
  • अमौसी
  • सुशांत गोल्फ सिटी
  • जुग्गौर
  • बरेल
  • सफदरगंज
  • भिटरिया
  • अयोध्या

शामिल हैं।

यह कॉरिडोर कानपुर, लखनऊ और अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण शहरों को तेज सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ेगा।

छह जिलों को जोड़ेगी 300 किमी आउटर रिंग रोड

SCR क्षेत्र में यातायात दबाव कम करने और नए विकास क्षेत्रों को जोड़ने के लिए 300 किलोमीटर लंबी आउटर रिंग रोड बनाने की योजना है।

यह रिंग रोड SCR में शामिल छह जिलों—

  • लखनऊ,
  • रायबरेली,
  • बाराबंकी,
  • सीतापुर,
  • उन्नाव,
  • हरदोई

को आपस में जोड़ेगी।

परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जाएगा।

पहला चरण

  • लंबाई: 105 किलोमीटर
  • अनुमानित लागत: 2,100 करोड़ रुपये

दूसरा चरण

  • लंबाई: 195 किलोमीटर
  • अनुमानित लागत: 3,900 करोड़ रुपये

इस सड़क नेटवर्क से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक व आवासीय विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

151 किमी लंबी रिंग रेल से मजबूत होगी कनेक्टिविटी

SCR क्षेत्र में सड़क के साथ-साथ रेल नेटवर्क को भी मजबूत करने की तैयारी है। इसके तहत 151 किलोमीटर लंबी रिंग रेल परियोजना विकसित की जाएगी।

यह परियोजना भी दो चरणों में पूरी होगी—

  • पहले चरण में 63 किलोमीटर रेल लाइन,
  • दूसरे चरण में 88 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा।

रिंग रेल से लखनऊ और आसपास के जिलों के बीच आवागमन आसान होगा और उपनगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

बछरावां और संडीला बनेंगे औद्योगिक हब

राज्य सरकार ने SCR क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार के लिए रायबरेली के बछरावां और हरदोई के संडीला को विकसित औद्योगिक क्षेत्रों के रूप में तैयार करने की योजना बनाई है।

इन क्षेत्रों में उद्योगों के आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

लखनऊ SCR का बदलेगा आर्थिक नक्शा

विशेषज्ञों के अनुसार, एक साथ सड़क, रेल और रीजनल रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क विकसित होने से लखनऊ महानगर क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो सकता है। बेहतर कनेक्टिविटी से जहां लोगों का आवागमन आसान होगा, वहीं नए औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार केंद्रों के विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।

सरकार का लक्ष्य SCR को एक ऐसे आधुनिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना है, जहां राजधानी लखनऊ के साथ आसपास के जिले भी आर्थिक विकास की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ सकें।

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