लखनऊ हाईकोर्ट ने सहारा की याचिका खारिज की, नगर निगम की कार्रवाई को बताया उचित

लखनऊ, 29 अप्रैल 2026 (यूएनएस)। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने चर्चित सहारा सिटी मामले में अहम फैसला सुनाते हुए सहारा कमर्शियल की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने लखनऊ नगर निगम की कार्रवाई को विधिसम्मत और उचित ठहराया है।

करीब 170 एकड़ में फैले सहारा सिटी प्रोजेक्ट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। नगर निगम ने लीज शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पहले ही सख्त कदम उठाते हुए पूरे परिसर के छहों गेट सील कर प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था।

अदालत ने सुनवाई के दौरान माना कि नगर निगम ने पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत अपनाई और संबंधित पक्ष को सुधार के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए। इसी आधार पर सहारा कमर्शियल की याचिका को खारिज कर दिया गया।

नगर निगम की ओर से कोर्ट में बताया गया कि कंपनी को वर्ष 2020 और 2025 में कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन लीज की शर्तों के अनुसार निर्माण और उपयोग संबंधी मानकों का पालन नहीं किया गया। लगातार अनदेखी के बाद ही निगम ने अंतिम कार्रवाई करते हुए संपत्ति को अपने कब्जे में लिया।

सुनवाई में यह भी स्पष्ट हुआ कि संबंधित भूमि की 30 वर्ष की लीज अवधि समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद विकास कार्य अधूरे रहे। नगर निगम ने तर्क दिया कि सार्वजनिक भूमि और संसाधनों की सुरक्षा के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।

इस मामले में नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देशन में अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव, संपत्ति प्रभारी रामेश्वर प्रसाद समेत अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। पैनल अधिवक्ताओं ने कोर्ट में सभी दस्तावेज और प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिससे निगम का पक्ष मजबूत साबित हुआ।

हाईकोर्ट के इस फैसले को नगर निगम के लिए बड़ी कानूनी सफलता माना जा रहा है। साथ ही, इससे शहर में नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का स्पष्ट संदेश भी गया है।

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