यूपी में बिजली महंगी होने की आशंका, नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 2.5 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगे बिजली बिल का सामना करना पड़ सकता है। इसकी शुरुआत नोएडा और ग्रेटर नोएडा से होने के संकेत मिल रहे हैं, जहां करीब ढाई लाख उपभोक्ताओं को वर्तमान में मिल रही लगभग 10 प्रतिशत की राहत समाप्त हो सकती है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) की अधिशेष राशि (सरप्लस) का पुनर्मूल्यांकन किए जाने के बाद यह स्थिति बनी है।

सरप्लस राशि घटने से बढ़ी चिंता

एनपीसीएल को पिछले कई वर्षों से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में लगभग 10 प्रतिशत तक की राहत देने का लाभ मिल रहा था। इसका आधार कंपनी के पास उपलब्ध अधिशेष राशि थी। पहले नियामक आयोग ने यह अधिशेष राशि 1,500.62 करोड़ रुपये मानी थी, लेकिन हालिया पुनर्मूल्यांकन में इसे घटाकर 593.81 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

सरप्लस राशि में आई इस बड़ी कमी के बाद कंपनी के सामने उपभोक्ताओं को दी जा रही छूट को कम करने या पूरी तरह समाप्त करने की स्थिति बन गई है। यदि ऐसा होता है तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल बढ़ जाएंगे।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

वर्ष 2018 से 2025 के बीच के बिजली टैरिफ से जुड़े मामले में एनपीसीएल ने अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटेल) का दरवाजा खटखटाया था। न्यायाधिकरण के हस्तक्षेप के बाद उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने कंपनी की वित्तीय स्थिति और अधिशेष राशि की दोबारा समीक्षा की। इसी समीक्षा के बाद अधिशेष राशि का आंकड़ा काफी कम कर दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिशेष राशि घटने का सीधा असर उपभोक्ताओं को दी जाने वाली राहत पर पड़ सकता है, जिससे बिजली दरों में अप्रत्यक्ष वृद्धि की स्थिति पैदा होगी।

पूरे प्रदेश में भी बढ़ सकती हैं बिजली दरें

इस बीच प्रदेश में नए बिजली टैरिफ की घोषणा भी जल्द होने वाली है। माना जा रहा है कि नई दरों में बिजली शुल्क बढ़ाया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश जारी करने के बाद ही स्पष्ट होगा।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि बिजली कंपनियां बढ़ती लागत, खरीद मूल्य और वितरण व्यय का हवाला देते हुए दरों में संशोधन की मांग कर रही हैं। ऐसे में आगामी टैरिफ आदेश पर पूरे प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं की निगाहें टिकी हैं।

उपभोक्ता परिषद ने किया विरोध

विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग के फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। परिषद का कहना है कि अधिशेष राशि के पुनर्मूल्यांकन का भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालना उचित नहीं होगा। परिषद ने आयोग के समक्ष इस निर्णय के खिलाफ याचिका भी दाखिल की है।

परिषद का दावा है कि प्रदेश की विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों पर उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ रुपये का अधिशेष बनता है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय बिजली महंगी करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

अन्य बिजली कंपनियां भी उठा सकती हैं मांग

एनपीसीएल मामले के बाद प्रदेश की अन्य वितरण कंपनियां भी अपने-अपने अधिशेष खातों की पुनः समीक्षा की मांग कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो बिजली टैरिफ निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बिजली दरों को लेकर बहस और तेज होगी। फिलहाल नोएडा और ग्रेटर नोएडा के करीब 2.5 लाख उपभोक्ताओं की नजर नियामक आयोग के अगले फैसले पर टिकी है, क्योंकि वही तय करेगा कि उन्हें मिल रही 10 प्रतिशत राहत जारी रहेगी या बिजली का झटका उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *