लखनऊ, 01 जुलाई 2026 (यूएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सहारनपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय इस्माइलपुर कंपोजिट से राज्यव्यापी ‘स्कूल चलो अभियान-2026’ के दूसरे चरण का शुभारंभ करते हुए शिक्षा को व्यक्ति, समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला बताया। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नौनिहालों को अपने हाथों से किताबें, कॉपियां, स्कूल बैग और स्टेशनरी किट वितरित की। मुख्यमंत्री के हाथों शैक्षणिक सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उन्होंने बच्चों से आत्मीय संवाद किया, चॉकलेट दी और पूछा कि वे नियमित स्कूल आएंगे या नहीं। बच्चों ने मुस्कुराकर स्कूल आने का वादा किया।
मुख्यमंत्री ने विद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों के नवाचारों की सराहना की। इसके बाद उन्होंने बच्चों को अपने हाथों से मध्यान्ह भोजन परोसा। भोजन शुरू होने से पहले बच्चों ने मंत्रोच्चार किया। मुख्यमंत्री ने कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से बातचीत की और उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नन्हे-मुन्ने बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया। उन्होंने बच्चों को चंदन का तिलक लगाकर खीर खिलाई और खिलौने भेंट किए। कई बच्चे मुख्यमंत्री की गोद में भी खेले। विपरीत मौसम के कारण अन्नप्राशन कार्यक्रम कक्षा कक्ष में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में सहारनपुर जिले के पांच उत्कृष्ट विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों में उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबडोला की इंदु बेस, प्राथमिक विद्यालय सरसावा नंबर-1 के कुलदीप अरोड़ा, प्राथमिक विद्यालय तबर्रकपुर के अश्वनी कुमार शर्मा, प्राथमिक विद्यालय घान्ना खंडी के हराज सिंह तथा कंपोजिट विद्यालय खिड़का जुनारदार की मोहिनी पाल शामिल रहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में शुरू किए गए स्कूल चलो अभियान ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किया है। उन्होंने बताया कि उस समय बेसिक शिक्षा परिषद के केवल 36 प्रतिशत विद्यालय ही आवश्यक सुविधाओं से संतृप्त थे, लेकिन ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से यह आंकड़ा बढ़कर 96 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, फर्नीचर, मिड-डे मील और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया। प्रत्येक छात्र को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, बैग और पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं। इसके परिणामस्वरूप पिछले नौ वर्षों में बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में 60 लाख से अधिक नए बच्चों का नामांकन हुआ तथा ड्रॉपआउट दर 19-20 प्रतिशत से घटकर 3-4 प्रतिशत रह गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित रहता है तो यह केवल उसके परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की क्षति है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, शिक्षकों, अधिकारियों, व्यापारियों, चिकित्सकों और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे अपने आसपास ऐसे बच्चों की पहचान करें जो अभी तक स्कूल नहीं पहुंच पाए हैं और उनका नामांकन सुनिश्चित करें।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी विशेष योजनाएं संचालित कर रही है। डेढ़ लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। गंभीर एवं बहुदिव्यांग बच्चों के लिए एस्कॉर्ट भत्ता तथा दिव्यांग छात्राओं को वार्षिक छात्रवृत्ति भी दी जा रही है। साथ ही शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अगले 15 दिनों तक विशेष नामांकन अभियान चलाने का आह्वान करते हुए कहा कि वे घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करें और प्रत्येक बच्चे को विद्यालय तक लाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को रोचक और व्यवहारिक तरीके से शिक्षा देना समय की आवश्यकता है ताकि सीखने की प्रक्रिया आनंददायक बन सके।
कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी, विधायक मुकेश चौधरी, राजीव गुंबर, देवेंद्र कुमार निम, पूर्व सांसद राघव लखनपाल, प्रदीप चौधरी, सिडको के अध्यक्ष वाई.पी. सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत राणा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
