सिर्फ कानून नहीं, पूरी परीक्षा व्यवस्था बदलनी होगी: पेपर लीक विधेयक पर राज्यसभा में खड़गे का सरकार पर हमला

वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, न्यायिक जांच और राष्ट्रीय रोजगार रणनीति की मांग; सरकार पर छात्रों की आवाज अनसुनी करने का आरोप

नई दिल्ली, 30 जुलाई 2026। राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल कड़े कानून बना देने से पेपर लीक की समस्या समाप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि असली जरूरत परीक्षा प्रणाली में व्यापक और संस्थागत सुधार की है, जिससे युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हो सके।

खड़गे ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया संशोधन विधेयक भविष्य में कितना प्रभावी होगा, इस पर गंभीर सवाल हैं। उनके अनुसार यदि परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो नए कानून का भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेगा। उन्होंने सरकार से देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की, ताकि परीक्षाओं और भर्तियों की प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी हो और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो।

‘छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया’

बहस की शुरुआत करते हुए खड़गे ने कहा कि हालिया छात्र आंदोलनों ने सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के बढ़ते दबाव के कारण ही सरकार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा और अब संशोधन विधेयक लाया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने दो वर्ष पहले मूल कानून बनाते समय ही प्रभावी प्रावधान किए होते तो आज संशोधन की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों ने परीक्षा प्रणाली की कमियों को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।

छात्रों पर कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग

खड़गे ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान अनेक छात्र घायल हुए, कुछ को पैलेट गन के छर्रे लगे और कई पर बल प्रयोग किया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य कार्रवाई का आदेश किस स्तर से दिया गया।

उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े इतने गंभीर विषय पर सरकार को जवाब देना चाहिए।

एनटीए और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया गया और परीक्षाएं पुराने ढर्रे पर ही आयोजित होती रहीं, तो भविष्य में भी पेपर लीक जैसी घटनाएं दोहराई जाएंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि देशभर में लगातार प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के बावजूद खुफिया एजेंसियां और संबंधित संस्थान क्या कर रहे थे।

खड़गे ने यह भी कहा कि पेपर लीक मामलों में गिरफ्तार कई आरोपियों को अब तक सजा नहीं मिल पाई है, जिससे कानून का भय समाप्त होता जा रहा है।

शिक्षा और रोजगार पर सरकार को घेरा

अपने संबोधन में खड़गे ने कहा कि देश में लगभग 10 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करना कठिन है। उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय युवा रोजगार रणनीति तैयार करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली और वैचारिक हस्तक्षेप को लेकर भी सरकार की आलोचना की तथा कहा कि शिक्षा व्यवस्था को स्वतंत्र, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

मनुस्मृति के उद्धरण पर सदन में हंगामा

अपने भाषण के दौरान खड़गे ने मनुस्मृति के एक अंश का हिंदी अनुवाद पढ़ा, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। सदन के नेता जे.पी. नड्डा और भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कार्यवाही से हटाने की मांग की। इसके बाद सभापति ने कहा कि उद्धृत अंश की प्रामाणिकता प्रमाणित नहीं होने के कारण उसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।

विधेयक पर आगे क्या

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। राज्यसभा में इस पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार, युवाओं के भविष्य और जवाबदेही को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। अब विधेयक के प्रावधानों और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर देशभर के करोड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं।

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