कौशल किशोर को लेकर भाजपा में सबकुछ ठीक नहीं? पूर्व सांसद रीना चौधरी के फेसबुक पोस्ट से बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ, 21 मई 2026। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर को लेकर पार्टी और पासी समाज की राजनीति में नए सिरे से हलचल तेज हो गई है। मोहनलालगंज की पूर्व सांसद रीना चौधरी ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखकर कौशल किशोर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने “आत्मसम्मान रैली” के पोस्टर को लेकर सवाल उठाते हुए इसे पूरे पासी समाज का अपमान बताया है।

दरअसल, कौशल किशोर की प्रस्तावित “आत्मसम्मान रैली” के पोस्टर में लिखा गया है कि “बुजदिल और मरी हुई इच्छाशक्ति के लोग रैली में न आएं।” इसी लाइन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रीना चौधरी ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि एक पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता की भाषा ऐसी नहीं होनी चाहिए, खासकर तब जब बात अपने ही समाज की हो।

रीना चौधरी ने आरोप लगाया कि आत्मसम्मान रैली के नाम पर पूरे पासी समाज को “बुजदिल” बताना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि पासी समाज महाराजा बिजली पासी और वीरांगना उदा देवी की विरासत वाला समाज है, जिसने हमेशा सर्व समाज को साथ लेकर राजनीति की है।

पूर्व सांसद ने कौशल किशोर पर परिवारवाद का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक अवसर बांटने की बात आई तो समाज के संघर्षशील युवाओं की जगह अपने परिवार को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद और जिला पंचायत चुनावों में भी परिवार के लोगों को आगे बढ़ाया गया, जबकि समाज के अन्य कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई।

रीना चौधरी ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि अब जब जनता परिवारवाद को नकार रही है तो पूरे समाज को अपमानित करना उचित नहीं है। उन्होंने कौशल किशोर से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कहा कि समाज अब किसी के निजी राजनीतिक हितों की सीढ़ी नहीं बनेगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रीना चौधरी का यह खुला हमला केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं बल्कि भाजपा के भीतर पासी समाज के नेतृत्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान का संकेत भी माना जा रहा है। खासकर लोकसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी ने पार्टी के अंदर सबकुछ सामान्य न होने की चर्चाओं को हवा दे दी है।

हालांकि, इस पूरे विवाद पर अभी तक कौशल किशोर या भाजपा संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है और पासी समाज के भीतर भी इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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