ईरान-अमेरिका समझौते के करीब, लेकिन अभी अंतिम डील नहीं: जेडी वेंस

वॉशिंगटन, 29 मई (यूएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को समाप्त करने और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की दिशा में बातचीत अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। हालांकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच अभी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है और फिलहाल किसी अंतिम समझौते की घोषणा करना जल्दबाजी होगी।

जेडी वेंस ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दोनों पक्ष विशेष रूप से यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। वेंस के अनुसार यदि समझौता हो जाता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर खोला जा सकेगा, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलेगी।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पहले ही ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को काफी कमजोर कर चुका है और उसके परमाणु कार्यक्रम को लंबे समय तक पीछे धकेलने की स्थिति में है। वेंस ने कहा कि संभावित समझौता अमेरिकी जनता और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता दोनों के हित में होगा।

युद्धविराम बढ़ाने पर चर्चा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर औपचारिक वार्ता शुरू करने की योजना शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि दोनों देशों के बीच एक प्रारूप तैयार हो चुका है, लेकिन उसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेतृत्व की अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

हालांकि ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा है कि किसी भी समझौते को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा विवाद

अमेरिका लंबे समय से ईरान से उच्च स्तर के संवर्धित यूरेनियम का उत्पादन बंद करने और मौजूदा भंडार को समाप्त करने की मांग करता रहा है। वॉशिंगटन का मानना है कि इस सामग्री का उपयोग परमाणु हथियार निर्माण में किया जा सकता है।

वेंस ने कहा कि अमेरिका को इस बार ईरान की मंशा गंभीर और सकारात्मक लग रही है। हालांकि अप्रैल में युद्धविराम लागू होने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार यह कह चुके हैं कि समझौता करीब है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर विशेष फोकस

रिपोर्टों के मुताबिक संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का प्रावधान शामिल हो सकता है। इसके तहत ईरान को 30 दिनों के भीतर समुद्री मार्ग में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा।

इसके बदले अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाने और ईरान को तेल निर्यात दोबारा शुरू करने के लिए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है।

ट्रंप ने अभी नहीं दी अंतिम मंजूरी

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप को प्रस्तावित समझौते की पूरी जानकारी दे दी गई है, लेकिन उन्होंने अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं दी है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में इस पर फैसला लिया जा सकता है।

इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया में 14 बिंदुओं वाले एक कथित समझौता मसौदे की जानकारी सामने आई थी, जिसमें अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरान के आसपास से अमेरिकी बलों की वापसी और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य यातायात बहाल करने जैसे प्रावधान बताए गए थे। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस दस्तावेज को पूरी तरह मनगढ़ंत करार दिया है।

युद्धविराम उल्लंघन के आरोप

समझौते की बातचीत के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। वहीं ईरानी मीडिया ने एक अमेरिकी विमान या ड्रोन को मार गिराने का दावा किया।

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी अमेरिकी विमान नहीं गिराया गया है और सभी हवाई संसाधन पूरी तरह सुरक्षित हैं।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर तरलीकृत प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने या जलमार्ग बंद होने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौता केवल क्षेत्रीय शांति के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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